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March 2, 2026 1:59 am

श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ बाहा पोरोब, सेंगेल अभियान ने लिया प्रकृति संरक्षण का संकल्प।

इकबाल हुसैन

पाकुड़िया (पाकुड़)। प्रखंड अंतर्गत ग्राम पातपहाड़ी में आदिवासी सेंगेल अभियान के तत्वावधान में बाहा पोरोब सह सरहुल पूजा श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ संपन्न हुई। पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच आयोजित इस पर्व में आदिवासी समाज की समृद्धि, एकता और प्रकृति के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया गया। पूजा का शुभारंभ ग्राम प्रधान शकील मुर्मू और नायकी (पुजारी) प्रेम मुर्मू ने पवित्र जाहेरथान में विधिवत अनुष्ठान के साथ किया। इस अवसर पर जाहेर आयो, मरांग बुरू, परगना बाबा, लुगुबुरू बाबा और लुगु आयो समेत इष्ट देवी-देवताओं की आराधना की गई। सखुआ (साल) और महुआ के फूल अर्पित कर सखुआ वृक्ष पर जलाभिषेक किया गया, जो प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और संतुलन का प्रतीक है। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सारना धर्म के संरक्षण का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि बाहा पोरोब केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, एकता और सांस्कृतिक विजय का प्रतीक है। समाज को संबोधित करते हुए सरना धर्म मंडवा के जिला अध्यक्ष ने संताल आदिवासियों की हासा-भाषा, जाति-धर्म, सम्मान और आबादी की रक्षा को प्राथमिकता बताते हुए रोजगार, चास-बास (खेती-बाड़ी) और पहचान की मजबूती के लिए राजनीतिक, धार्मिक व सांस्कृतिक एकजुटता पर जोर दिया। समारोह में सेंगेल अभियान के साहिबगंज जोनल हेड सोनातन हेंब्रम, पाकुड़िया प्रखंड के सेंगेल परगना फिलीप सोरेन, दिनेश सोरेन, सतन मुर्मू और गोमोस्ता टुडू उपस्थित रहे। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि बाहा पोरोब फूलों का पवित्र उत्सव है और जाहेरथान में सखुआ व महुआ की पूजा किए बिना नए फूलों का उपयोग वर्जित है। यह पर्व प्रकृति के साथ तालमेल और आभार का संदेश देता है। इस अवसर पर संजु हेंब्रम, अमिन टुडू, सिलाश मुर्मू, बाबुधन टुडू, कलम हांसदा, सुहागिनी मुर्मू और रिनाली सोरेन समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। पारंपरिक गीत-नृत्य के साथ पूरे गांव में उत्सव का माहौल बना रहा।

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