जिला संवाददाता अंकित कुमार लाल
मेदनीनगर: समय बदलता है तो बहुत कुछ बदल जाता है, लेकिन बचपन की कुछ यादें ऐसी होती हैं जो उम्र भर दिल में बसी रहती हैं। उन्हीं यादों में से एक है ठेले पर मिलने वाली बर्फ की रंग-बिरंगी आइसक्रीम, जिसकी एक चुस्की ही गर्मी के दिनों में ठंडक के साथ चेहरे पर मुस्कान ले आती थी।
एक दौर ऐसा था जब मोहल्लों और गलियों में ठेले वाले की आवाज या घंटी सुनते ही बच्चे घरों से दौड़ पड़ते थे। ठेले पर बड़ी बर्फ की सिल्ली रखी होती थी, जिसे घिसकर वह स्टिक या कप में जमा देता था। इसके बाद उस पर लाल, पीले, हरे जैसे रंग-बिरंगे फ्लेवर डाल दिए जाते थे। कई जगहों पर ऊपर से हल्का सा जलजीरा पाउडर भी छिड़क दिया जाता था, जिससे उसका स्वाद और भी अलग और चटपटा हो जाता था।
उस आइसक्रीम की खास बात यह थी कि वह सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसमें बचपन की सादगी, दोस्तों की मस्ती और गर्मी की छुट्टियों की यादें भी घुली रहती थीं। दो या पांच रुपये में मिलने वाली यह आइसक्रीम बच्चों के लिए किसी बड़े आनंद से कम नहीं होती थी।
लेकिन समय के साथ आधुनिक आइसक्रीम पार्लर और पैकेट वाली महंगी आइसक्रीम के दौर में यह पारंपरिक बर्फ वाली आइसक्रीम धीरे-धीरे कम होती जा रही है। आज के बच्चों के लिए यह शायद कोई अनजानी चीज हो, लेकिन जिन लोगों ने अपने बचपन में इसे खाया है, उनके लिए यह सिर्फ आइसक्रीम नहीं बल्कि बीते हुए दिनों की एक मीठी याद है।
मेदनीनगर शहर में भी अब यह आइसक्रीम बहुत कम दिखाई देती है। तेज रफ्तार जिंदगी और बदलती पसंद के बीच यह साधारण लेकिन खास स्वाद कहीं खोता सा नजर आता है।
फिर भी जब कभी सड़क किनारे ठेले पर यह रंग-बिरंगी बर्फ की आइसक्रीम दिख जाती है, तो लोग उसे सिर्फ खाने के लिए नहीं बल्कि अपने बचपन की उन ठंडी और मीठी यादों को एक बार फिर जीने के लिए जरूर खरीद लेते हैं।

मेदनीनगर: समय बदलता है तो बहुत कुछ बदल जाता है, लेकिन बचपन की कुछ यादें ऐसी होती हैं जो उम्र भर दिल में बसी रहती हैं। उन्हीं यादों में से एक है ठेले पर मिलने वाली बर्फ की रंग-बिरंगी आइसक्रीम, जिसकी एक चुस्की ही गर्मी के दिनों में ठंडक के साथ चेहरे पर मुस्कान ले आती थी।
एक दौर ऐसा था जब मोहल्लों और गलियों में ठेले वाले की आवाज या घंटी सुनते ही बच्चे घरों से दौड़ पड़ते थे। ठेले पर बड़ी बर्फ की सिल्ली रखी होती थी, जिसे घिसकर वह स्टिक या कप में जमा देता था। इसके बाद उस पर लाल, पीले, हरे जैसे रंग-बिरंगे फ्लेवर डाल दिए जाते थे। कई जगहों पर ऊपर से हल्का सा जलजीरा पाउडर भी छिड़क दिया जाता था, जिससे उसका स्वाद और भी अलग और चटपटा हो जाता था।
उस आइसक्रीम की खास बात यह थी कि वह सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसमें बचपन की सादगी, दोस्तों की मस्ती और गर्मी की छुट्टियों की यादें भी घुली रहती थीं। दो या पांच रुपये में मिलने वाली यह आइसक्रीम बच्चों के लिए किसी बड़े आनंद से कम नहीं होती थी।
लेकिन समय के साथ आधुनिक आइसक्रीम पार्लर और पैकेट वाली महंगी आइसक्रीम के दौर में यह पारंपरिक बर्फ वाली आइसक्रीम धीरे-धीरे कम होती जा रही है। आज के बच्चों के लिए यह शायद कोई अनजानी चीज हो, लेकिन जिन लोगों ने अपने बचपन में इसे खाया है, उनके लिए यह सिर्फ आइसक्रीम नहीं बल्कि बीते हुए दिनों की एक मीठी याद है।
मेदनीनगर शहर में भी अब यह आइसक्रीम बहुत कम दिखाई देती है। तेज रफ्तार जिंदगी और बदलती पसंद के बीच यह साधारण लेकिन खास स्वाद कहीं खोता सा नजर आता है।
फिर भी जब कभी सड़क किनारे ठेले पर यह रंग-बिरंगी बर्फ की आइसक्रीम दिख जाती है, तो लोग उसे सिर्फ खाने के लिए नहीं बल्कि अपने बचपन की उन ठंडी और मीठी यादों को एक बार फिर जीने के लिए जरूर खरीद लेते हैं।





