राजकुमार भगत
पाकुड़: चांद के मुबारक दीदार के साथ ही रहमतों और बरकतों से भरे मुकद्दस माह-ए-रमज़ान का आगाज़ गुरुवार से हो गया। सुबह सहरी के बाद रोज़ेदारों ने नियत के साथ पहला रोज़ा रखा और रब की इबादत में मशगूल हो गए।माह-ए-रमज़ान सब्र, तक़वा, रहमत और मग़फ़िरत का महीना है, जिसमें बंदे अपने रब की रज़ा हासिल करने के लिए दिनभर भूखे-प्यासे रहकर इबादत करते हैं। यह पाक महीना इंसान को गुनाहों से दूर रहकर नेकियों की राह पर चलने की तालीम देता है।रोज़ा सहरी के साथ शुरू होकर मगरिब की अज़ान तक जारी रहता है। सूर्यास्त के बाद रोज़ेदार इफ्तार कर अल्लाह तआला का शुक्र अदा करते हैं। रमज़ान के दौरान नमाज़, तिलावत-ए-क़ुरआन, ज़िक्र-अज़कार और सदक़ा-ख़ैरात का खास एहतमाम किया जाता है।इस्लाम में रोज़ा पांच अरकान (स्तंभों) में से एक अहम इबादत है, जो मोमिन को सब्र, हमदर्दी, इंसानियत और परहेज़गारी का पैग़ाम देता है। माह-ए-रमज़ान के आगाज़ के साथ ही पूरे क्षेत्र में रूहानी माहौल कायम हो गया है और मस्जिदों में इबादत के लिए नमाज़ियों की रौनक बढ़ गई है।








