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March 21, 2026 7:58 am

हीट स्ट्रोक और पेयजल समस्या पर आयोजित हुई कार्यशाला

स्कूलों और आँगनबाड़ी केंद्रों में मिट्टी के घड़े में शीतल जल रखने का निर्देश

प्रशांत मंडल

लिट्टीपाड़ा (पाकुड़)गुरुवार को प्रखंड कार्यालय लिट्टीपाड़ा के सभागार में हीट स्ट्रोक एवं पेयजल समस्या समाधान हेतू प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार की अध्यक्षता में सभी विभागों के विभागाध्यक्ष के साथ कार्यशाला सह बैठक का आयोजन किया गया।इस कार्यशाला सह बैठक में ग्रीष्म ऋतु में हीट स्ट्रोक के मामले में तेजी को ध्यान में रखते हुए इसके संकेत लक्षण और बचाव के उपाय एवं पेयजल समस्याओं का निदान के लिए विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि अधिक गर्म और शुष्क हवाओं में तापमान सामान्य तापमान से अधिक होने के कारण हीट स्ट्रोक या लू लगने का असर होता है। लू मार्च से जून के बीच चलती है लेकिन कभी-कभी इसका असर जुलाई तक भी देखने को मिलता है। लू से थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सिर में दर्द, उल्टी, खूब पसीना आना, गाढ़े रंग का पेशाब पेडू में ऐंठन होना और शरीर में पानी की कमी की निशानी है। सभी विद्यालय, आँगन बाड़ी केंद्र एवं आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों को हीट स्ट्रोक से बचाने और स्वच्छ पीने का पानी का इन्तेजाम करने तथा ताज़ा भोजन कराने, अत्याधिक धूप से बचने सहित साफ़ सफाई पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिये। साथ ही सभी आवासीय विद्यालय और विद्यालय सहित आँगन बाड़ी केंद्रों और कार्यालयों में नियमित रूप से मिट्टी का घड़ा में स्वच्छ शीतल जल ढक कर रखने की बात कही।वहीं उन्होंने कहा कि किसी भी गाँव या आँगनबाड़ी केन्द्र, विद्यालयों में पानी की आवश्यकता होने पर प्रखंड के सभी ग्राम पंचायतों में टैंकर उपलब्ध है।पंचायत या प्रखंड को सूचित करने पर ससमय पानी उपलब्ध करायी जायगी।वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, लिट्टीपाड़ा के डॉक्टर शेखावत हुसैन ने बताया कि हीट स्ट्रोक सर्वाधिक शिशुओं, बुजुर्ग लोग जो अक्सर हृदय, फेफड़े , गुर्दे के रोग से पीड़ित होते हैं या जो व्यक्ति धूप में शारीरिक परिश्रम या काम करते हैं। हीट स्ट्रोक से बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपाय निर्जलीकरण से बचना चाहिए अगर गर्म मौसम में शारीरिक गतिविधियाँ करनी हैं, तो खूब सारे तरल पदार्थ पिएँ (जैसे पानी और स्पोर्ट्स ड्रिंक्स), लेकिन शराब और कैफीन से बचना चाहिए। शीतल पेयजल का सेवन नियमित करना चाहिए। यदि अत्यधिक पसीना आता है या लंबे समय तक सूर्य की रोशनी में तीव्र गतिविधि करते हैं तो शरीर को इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम के साथ-साथ तरल पदार्थों की पुनःपूर्ति की आवश्यकता होती है।अपने आप को हाइड्रेट करने के लिए कार्य के दौरान बार-बार ब्रेक लेना, शिर पर टोपी और हल्के रंग के हल्के, ढीले कपड़े पहनना ज़रूरी होता है। शिशुओं, बच्चों या पालतू जानवरों को तेज धूप में जाने से रोकने की जरूरत है।हीटस्ट्रोक से आमतौर पर लोगों को तेज़ बुखार, दिमाग के ठीक काम न करने के लक्षण, उल्टी, गाढ़े रंग का पेशाब, और उच्च तापमान आदि लक्षण दिखाई देने पर तुरंत प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सम्पर्क करने की सलाह दी।इस कार्यशाला में सभी विभागों यथा बाल विकास विभाग से आँगन बाड़ी केंद्र ,JSLPS के स्वयं सहायता समूह, मनरेगा के बागवानी सखी, मनरेगा मेट, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय लिट्टीपाड़ा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय धरमपुर (कदवा), पहाड़िया कल्याण विद्यालय धनघरा एवं धरमपुर, मॉडल स्कुल हेठबंधा, राजकीयकृत उच्च विद्यालय लिट्टीपाड़ा को प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार द्वारा सांकेतिक रूप से मिट्टी का घड़ा प्रदान किया गया बैठक में मुख्य रूप से पेयजल स्वच्छता विभाग के सहायक अभियंता रवि शंकर, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी कमल पहाड़िया, प्रखण्ड कृषि सह प्रभारी कल्याण पदाधिकारी के. सी. दास, महिला पर्यवेक्षिका सोनाली, आवासीय विद्यालय के वार्डेन एवं प्रधानाध्यापक सीमा कुजूर , गुहिया पहाड़िया, सोबान सोरेन, फ्रेंक मुर्मू, प्रवाह एन.जी.ओ के प्रखंड समन्वयक शालिनी सन्नी सहित काफ़ी संख्या में विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मियों सहित महिलाएं उपस्थित थे।

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