कादम्बिनी सोरेन ने अपने तीन बच्चों के पालन-पोषण के साथ यह मुकाम हासिल किया है
तीन बच्चों के पालन पोषण के साथ-साथ इतने बड़े मुकाम को हासिल कर गौरवान्वित महसूस कर रही हूं :- कादम्बिनी सोरेन
बिक्की सन्याल
पाकुड़। शिक्षा ग्रहण में नहीं होती है कोई बाधा यह बात को साबित करते हुए पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड स्थित रोलाग्राम गांव की गणेश चंद्र सोरेन की पुत्री कादम्बिनी सोरेन ने पीएचडी करके किया है. उन्होंने सिद्धू कान्हू मुर्मू यूनिवर्सिटी दुमका के मनोविज्ञान विभाग से पीएचडी की डिग्री हासिल की है। उन्होंने अपनी पीएचडी रिसर्च को अपने तीन बच्चों के पालन-पोषण के साथ यह मुकाम हासिल किया है। इसमें उनका भरपूर सहयोग उनके पति संतोष हेंब्रम ने किया है। उन्होंने रिसर्च के बारे में बात करते हुए कहा कि मैं अपने इस रिसर्च का श्रेय अपने रिसर्च गाइड डॉ. पुष्पलता को दिया है साथ ही उन्होंने कहा की अगर डॉ. स्वतंत्र कुमार सिंह और कलानंद ठाकुर जैसे विद्वान शिक्षक का सहयोग ना होता तो शायद ही यह मुकाम मुझे मिल पाता। एक महिला होते हुए मुझे कभी नहीं लगा की पढ़ाई में कोई बाधा परिवार के देखरेख करते हुए आती है। बस दृढ़ निश्चय और सच्ची लगन की आवश्यकता है समाज में आदिवासी महिलाओं की स्थिति और खास करके महिलाओं में शिक्षा की स्थिति अच्छी नहीं है, आगे मेरी कोशिश होगी आने वाली पीढ़ियों में यह मैसेज जाए कि महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करना कितना जरूरी है। आदिवासी महिलाओं को उच्च शिक्षा में भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत है तब ही आदिवासी महिलाओं और आदिवासी समाज का सम्पूर्ण विकास संभव है।क्योंकि आदिवासी समाज में महिलाएं रीढ़ की तरह है। अपने इस संघर्ष में पिता गणेश चंद्र सोरेन और माता मंजुला टुडू, ससुर जी दाऊद हेंब्रम, सासु सुरुधनी किस्कू, पुत्री एंजल और आशा, पुत्र एरिक डेविड हेंब्रम का सहयोग को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।







