नगर परिषद में बहुमत बनाम नियम का विवाद।
पाकुड़ नगर परिषद में करीब दो करोड़ रुपये की सड़क योजनाओं के चयन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नगर परिषद के 10 वार्ड पार्षदों ने उपायुक्त को शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि बोर्ड की विधिवत स्वीकृति से पहले ही उपाध्यक्ष समर्थित 11 वार्डों के लिए योजनाओं का चयन कर निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई, जबकि शेष 10 वार्डों को विकास योजनाओं से वंचित कर दिया गया। पार्षदों ने झारखंड गजट (असाधारण) संख्या-456, दिनांक 15 सितंबर 2014 का हवाला देते हुए कहा है कि विकास निधि के वार्डवार वितरण और योजनाओं के चयन के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित है। इसके तहत जनसंख्या, क्षेत्रफल, वार्ड समिति की अनुशंसा, बोर्ड की स्वीकृति तथा “अधिकतम जनसंख्या को अधिकतम लाभ” के सिद्धांत को प्राथमिकता दी जानी है। शिकायत के अनुसार वार्ड संख्या 05, 06, 07, 08, 09, 10, 11, 14, 16, 18 और 19 के लिए योजनाओं का चयन कर निविदा प्रकाशित कर दी गई, जबकि वार्ड संख्या 01, 02, 03, 04, 12, 13, 15, 17, 20 और 21 विकास योजनाओं से बाहर रह गए। पार्षदों का आरोप है कि 2 जुलाई 2026 की बोर्ड बैठक में शेष 10 वार्डों के लिए तैयार योजनाओं को भी उपाध्यक्ष समर्थित पार्षदों के बहुमत के कारण मंजूरी नहीं मिल सकी।
पार्षदों ने इसे केवल राजनीतिक या व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि सार्वजनिक विकास निधि के समान और नियमसम्मत उपयोग का मामला बताया है। उनका कहना है कि वंचित वार्डों में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग की उल्लेखनीय आबादी भी है, ऐसे में योजनाओं का असमान वितरण नगर परिषद के संतुलित और समावेशी विकास पर सवाल खड़ा करता है। शिकायत में उपायुक्त से 11 वार्डों की सड़क योजनाओं के चयन और निविदा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने, जांच पूरी होने तक कार्यादेश अथवा निर्माण कार्य शुरू करने पर रोक लगाने तथा नियम विरुद्ध पाए जाने पर निविदा की समीक्षा/निरस्तीकरण कर सभी 21 वार्डों की जनसंख्या, क्षेत्रफल और आवश्यकता के आधार पर नए सिरे से योजना चयन कराने की मांग की गई है। साथ ही बोर्ड की निर्णय प्रक्रिया को बहुमत के आधार पर प्रभावित किए जाने के आरोप की भी जांच की मांग की गई है। पार्षदों ने स्पष्ट किया है कि उनकी आपत्ति किसी वार्ड को योजना मिलने पर नहीं, बल्कि 21 वार्डों की निधि का लाभ केवल 11 वार्डों तक सीमित किए जाने और निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी पर है। अब पूरे मामले में उपायुक्त स्तर से होने वाली कार्रवाई पर नगर परिषद के पार्षदों के साथ-साथ शहरवासियों की भी नजर टिकी है।





