रात के अंधेरे में ओवरलोड हाईवा और ट्रैक्टर के माध्यम से करवाई जाती है अवैध ढुलाई।
एक चालान पर कई ट्रिप का खेल सबका साथ सबका विकास।
हाथीगढ़,मानसिंहपुर,कालीदासपुर, कसिला के पत्थर व्यवसाई करवाते है जिला प्रशासन की रेकी, हर मोड़ पर चाय पान दुकान की गुमटी पर बैठे मिल जायेंगे एजेंट।
चालान पर लिखे होते है A,P,H,N,I जैसे कोड भाषा, मालिक द्वारा अपने अपने कोड पहले ही बता दी जाती है नाका वालों को व्हाट्स ऐप पर।
बजरंग पंडित पाकुड़।
पाकुड के हिरणपुर एवं मुफस्सिल थाना क्षेत्र में इन दिनों धड़ल्ले से चल रहा सीटीओ से अधिक प्रोडक्शन का खेल, सीटीओ की क्षमता से अधिक प्रोडक्शन कर पत्थर को खपाने के लिए हिरणपुर और मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पत्थर व्यवसाई रात के अंधेरे में खेलते है अवैध परिवहन का खेल,ट्रैक्टर और बड़ी गाड़ियों से रात भर खपाया जाता है गिट्टी,अधिक खाने की आदत ऐसी लगी की अब सारा काम अवैध रूप से ही किया जा रहा है,कोई एक चालान पर दो ट्रिप का खेल खेल रहे है तो कोई एक चालान एक नंबर पर कई ट्रिप का खेल खेल रहे है तो कोई पीडीएफ का खेल जिसकी जैसी सेटिंग लेकिन खेल तो किया जा रहा है, सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार चालान के खेल में मुख्य भूमिका चेक नाका की है,इन्हीं चेक नाका की मदद से एक चालान पर कई ट्रिप का खेल संभव हो पा रहा है।
सीतपहाड़ी और बिक्रमपुर मोड़ पर स्थित खनन चेक नाका जहां चलता है क्रेशर मलिक एवं गाड़ी मालिकों की कोड भाषा
हिरणपुर और मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पत्थर व्यवसाई चालान बचाने को लेकर नई बनी रामनाथपुर की ग्रामीण सड़क का खूब इस्तेमाल कर रहे है ,मुफस्सिल के पत्थर व्यवसाई की सेटिंग और तगड़ी है बिक्रमपुर नाका पर चलते है इनके अपने कोड भाषा,A नाम का पत्थर व्यवसाई चालान के पीछे या आगे A लिख का भेज देता है और नाका से गाड़ी भी पार हो जाती है,ऐसे ही कई पत्थर व्यवसाई है जिनके अलग अलग नाम है A, N, H, P, यह अक्षर नाम के अनुसार कोड भाषा है चेक नाका वालों के लिए एक तरह का इशारा,इन नामों को देख काफी मददगार हो जाते है चेक नाका वाले बात जो हरे रंग के कागज की है,मुफस्सिल के पत्थर व्यवसाई के अपने दर्जनों के हिसाब से गाडियां है,इन गाड़ियों से अपने क्रेशर का पत्थर ढोने का काम करते है और चालान को बचा अतिरिक्त पत्थर को खपाने का काम भी रोजाना रात को करते आए है।
मुफस्सिल थाना क्षेत्र में कुछ पत्थर खदाने ऐसी है जो बिलकुल सड़क के समीप है,सड़क से महज 100 फिट की दूरी पर स्थित है पगला की पत्थर खदान,एवं क्रेशर मशीन जो पर्यावरण एवं ग्रामीणों की सेहत दोनो के लिए गंभीर खतरा है और यही हाल कालिदासपुर के डूंगरी टोला का भी है जहां मुख्य सड़क से 100/150 फिट की दूरी पर स्थित है बंगाल निवासी की पत्थर खदान, इन खदानों से होने वाले विस्फोट से दहल जाते है आस पास के इलाके






