एक चापानल पर 150 परिवार निर्भर,कैसी बुझेगी प्यास??
जल उपलब्ध कराना पीएचडी का काम,लेकिन पीएचडी हर मोर्चे पर विफल,सिर्फ और सिर्फ लूट खसोट का धंधा बना विभाग।
बजरंग पंडित
पाकुड़िया प्रखण्ड क्षेत्र में गर्मी के मौसम के दशक देते ही जल संकट का सिलसिला शुरू हो गया है । सरकार के साथ निश्चय में शामिल जल नल योजना भी लोगों की प्यास बुझाने में नकाफी साबित हो रही है । वही माड़गाँव में गांव के दोबाटिया डुगरी टोला ,लातार टोला , चौराहे पर स्थित चापाकल गाडिया टोला , खास पाड़ा ,चापाकल पानी के लिए चपाकल पर लाईन लगी महिलाओं-पुरुषों की भीड़। कई दिनों से गांव हैं जहां लोगों को पेयजल के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इस भीषण गर्मी ने कठिनाई और अधिक बढ़ा दी है। ऐसा ही लागडुम पंचायत अंतर्गत का एक गांव माड़गॉव है।इस गांव में 150 से आधिक संताल परिवारों को अब तक शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पाया है। ग्रामीण बाहामुनी टुडू ,दुली बास्की , लखी मरांडी, बिटिया बास्की ,सतन मुर्मू,भावेश टुडू , ,आदि ने बताया कि हमलोग आज भी एक चापाकल एवं कुआं के उपर 150 परिवार निर्भर करते हैं। गांव के लिए पेयजल एक बड़ी समस्या है। गांव में पानी की घोर किल्लत है। एक चपाकल एवं गॉव से दुर बायहाड़ कुआं के सहारे पूरे संताल परिवार का गुजारा होता है। इसी से हमलोगों की प्यास बुझती है। इसके कारण कभी-कभी स्नान करने या फिर पानी लेने के लिए चपाकल पर घंटों इंतजार करना पड़ता है तो गांव से कोई दूर कुआ के पास जाना पड़ता हैं जहां पानी भी शुद्ध नहीं है और काम है।श्रीमति बाहामुनी टुडू ने बताया कि पानी के अभाव में यहां के महिलाओं का जीवन नर्क बनकर रह गया है। महिलाओं का अधिकतर समय चापकल से पानी भरकर घर लाने में ही बीत जाता है। साथ ही कुआं का गंदा पानी पर लोगों की भीड़ लगी रहने के कारण महिलाओं को स्नान करने में भी काफी असुविधा होती है। पंचायत समिति सदस्य लुकास मुर्मू ने कहा कि सरकार एवं विभाग से नम्र निवेदन हैं कि सोलर आधारित जलमीनर टंकी जल्द से जल्द गांव में उपलब्ध करा दिया जाय।






