सुदीप कुमार त्रिवेदी
पाकुड़ शहर के ठीक बीचों बीच आबाद इलाका बैंक कालौनी के पीछे बने लाखों रूपये की लागत से बना स्टेडियम शाम होते ही घुप्प अंधेरे में डूब जाने को विवश है । लंबे चौड़े क्षेत्रफल में फैले इस स्टेडियम का आलम यह है कि इस गोलाकार स्टेडियम के पीछे रौशनी का एक कतरा भी नहीं होता है जबकि बैंक कालौनी से होकर प्यादापुर जाने वाले लोग रोजाना दिन या शाम को इसी स्टेडियम की चाहरदीवारी से लगती सड़क का इस्तेमाल करते हैं । राहगीरों को शाम ढलते ही अपने टार्च या मोबाइल के लाइट से काम चलाना पड़ता है । अमूमन दिन में इस इलाके में चहल पहल व भीड़ रहती है लेकिन शाम का अंधेरा पसरते ही इस इलाके की सड़क पर सन्नाटा पसर जाता है । इस स्टेडियम के पीछे भी आबाद इलाका है जहां बिजली रहती है । शाम व सुबह इस स्टेडियम में आसपास के इलाके हल्के फुल्के वर्जिश करने व टहलने आते हैं । हालांकि रात्रि में इस स्टेडियम के मुख्य प्रवेश द्वार रौशनी रहती है लेकिन इसकी गोलाकार चाहरदीवारी से लगती सड़क अंधेरे में डूबी रहती है । पास में बच्चों के लिए बना एक पार्क व क्रीड़ा स्थल भी अनदेखी का शिकार बन चुका है। इलाके को लोगों के साथ साथ स्टेडियम को भी मानो इलाके के रौशनी से जगमगाने हेतु तारणहार का इंतजार है । इस मुद्दे पर बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता से दूरभाष पर संपर्क स्थापित नही होने के कारण उनका पक्ष नही लिया जा सका ।





