इकबाल हुसैन
महेशपुर प्रखंड सभागार में प्रखंड स्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का शुभारंभ प्रखंड प्रमुख शुभ लक्ष्मी मुर्मू , प्रखंड विकास पदाधिकारी सिद्धार्थ शंकर यादव ,बीस सूत्री अध्यक्ष अब्दुल वदूद ,बीस सूत्री उपाध्यक्ष नशीम अहमद, जीप सदस्य समसून मुर्मू के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।किसान मित्र को संबोधित करते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा कि अधिक से अधिक कृषि ऋण का आवेदन कर बैंको से ऋण प्राप्त करना है। प्रखंड प्रमुख शुभलक्ष्मी मुर्मू ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि किसानों को दलहन,तेलहन की खेती करने के लिए प्रेरित किया जाए। बीस सूत्री अध्यक्ष अब्दुल वदूद ने कहा की अभी खाली परे खेतों में कौन सी फसल को लगाना है, इसकी जानकारी लेना है और जो फसल लगाया जा चुका है जैसे धान, मक्का, अरहर आदि फसलों को कीटों, रोगों से कैसे बचाया जाए, इसकी जानकारी हर एक किसान को होना चाहिए। ताकि किसानों को अपनी जमीन में अधिक से अधिक लाभ मिल सके और हमारा किसान सुखी हो सके। केंद्र एवं राज्य से संचालित कृषि एवं संबद्ध विभाग की योजनाओं का विस्तार से शांतनु कुमार शील, सहायक तकनीकी प्रबंधक पाकुड़ द्वारा बताया की विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं में से राज्य योजना अंतर्गत बिरसा फसल विस्तार योजना, केसीसी, स्वाइल हेल्थ कार्ड योजना, किसान समृद्धि योजना, पीएम कुसुम योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना अंतर्गत पर (PDMC) पीडीएमसी आदि का लक्ष्य और उपलब्धि के बारे में विस्तार से बताया गया जिसे इस खरीफ मौसम में किया जाना है, ताकि किसानों की आर्थिक स्थिति और उत्पादन के साथ उत्पादकता में बढ़ोतरी हो सके। किसान समृद्धि योजना अंतर्गत चलित सोलर पंप सेट किसानों को 90% अनुदान पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें किसानों को 2 एचपी के लिए ₹20 से 25 हजार एवं 5 एचपी के लिए ₹60 से 70 हजार लगेंगे।सहायक तकनीकी प्रबंधक अभिजीत कुमार शील ने बताया कि सरकार का निदेश है कि किसानों को खेती के लिए किसी खास मौजा या क्षेत्र मे यदि जल स्रोत उपलव्ध नही है और जल स्रोत नही रहने के कारण खेती नही हो पा रही है, तो वैसे सभी स्थलो का सर्वे करे और इसकी सूचना मोजा सहित एवं कौन सी जल स्रोत चाहिए, दें। जैसे चेक डैम, तालाब, डोभा आदि की आवश्यकता है तो इसकी सूचना सहायक तकनीकी प्रबंधक को दें ताकि वैसे सभी स्थानों पर जल स्रोत का निर्माण की कार्रवाई की जा सके। इसका सर्वे 20 अगस्त 2024 तक निश्चित रूप से करना है एवं सूचना देना हैं, ताकि अग्रेतर करवाई की जा सके।प्रखंड कृषि पदाधिकारी अब्दुल बाहव अंसारी द्वारा बताया की धान या अन्य फसलो को बीज उपचार कर के ही लगाया जाए ताकि फसल बीमारी और कीट से बचे रहे । धान के प्रमुख कीट तना छेदक के बारे में विस्तार से बताया गया और उसके नियंत्रण के उपाय बताए गए। किसानों को बताया गया कि जैविक कीटनाशी का प्रयोग अधिक से अधिक करें एवं प्रयोग के तौर पर छोटे से हिस्से मे करें, ताकि पूर्ण रूप से तरीका अच्छे से सीख सके। प्रकृति से प्राप्त जैविक विधि से निर्मित कीटनाशी का प्रयोग किया जाए और रसायनिक कीटनाशी के प्रयोग से बचे। रासायनिक कीटनाशक के दुष्प्रभाव का विस्तार से किसानों को बताया गया। जैविक विधि से तैयार जीवामृत बनाने की विधि विस्तार से बताई गई और उनके प्रयोग एवं लाभ के बारे में किसानों को बताया गया। साथ ही जीवामृत के अवयवों मे नीम के पत्तों आदि का प्रयोग कर कीटनाशक जैसा लाभ मिलता है, और यदि खरपतवार को डालकर उसका घोल तैयार किया जाए तो, खरपतवार नियंत्रण किया जा सकता है। और इसके बनाने की विधि विस्तार से बताई गई।कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारी द्वारा 10 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया गया।इस मौक़े पर प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ कलीमुद्दीन अंसारी,सैकड़ो किसान मित्र समेत प्रगतिशील किसान मौजूद थे।






