सतनाम सिंह
पाकुड़: पाकुड़ शहर के बीचों बीच टीन बंगला के निकट (मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस गर्ल्स के बगल में )पांच लाख रुपए खर्च कर 100 सीटों वाला अल्पसंख्यक बालिका छात्रावास लॉकडाउन से पहले ही बनकर तैयार है। लेकिन इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। अभी तक बालिका छात्रावास उद्घाटन नहीं होने के पीछे कौन जिम्मेदार है ? संबंधित विभाग या जिला प्रशासन या जनप्रतिनिधि। आखिर यह अल्पसंख्यक हॉस्टल बनाने के पीछे उद्देश्य क्या था? सरकारी रूपयों का सुदुपयोग या दुरूपयोग करना था । चार साल से यह हॉस्टल उद्घाटन की राह देख रहा है। यह हॉस्टल जिस समुदाय के लिए बना है।उन लोगों से यह हॉस्टल उम्मीद लगाए बैठा है कि एक दिन कोई फरिश्ता बनकर आगे आकर उसे आबाद करेगा ।लेकिन अल्पसंख्यक बालिका हॉस्टल जिस समुदाय के लिए बना है वह समुदाय सोया हुआ है।आखिर कौन इसकी सुधि लेगा ।वोट बैंक की राजनीति करने वाले पाकुड़ के जनप्रतिनिधि अपने ही समुदाय का भला नहीं चाहते हैं।अगर वह भला चाहते तो 100 अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियां पाकुड़ सदर में रहकर अपनी पठन-पाठन को सुचारू रूप से कर पाती ।आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह पाकुड़ में रहकर पढ़ाई नहीं कर पाती है ।और मैट्रिक पढ़ने के बाद ही आगे की पढ़ाई बहुत कम ही कर पाती है।इसके लिए कौन जिम्मेदार है ? क्षेत्र के जनप्रतिनिधि या जिला प्रशासन या संबंधित विभाग? जनता की अदालत में न्याय होनी चाहिए।जो दोषी है उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई ।अगर विभाग जिम्मेदार है तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई । जो परिवार आर्थिक रूप से संपन्न हैं,वह अपनी बेटियों को पाकुड़ में निजी घरों में रखकर पढ़ा रहे हैं।बहुत सारी अल्पसंख्यक लड़कियां निजी घरों में एक हजार रूपए प्रति बेड खर्च कर पढ़ाई कर रही है और इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ देती है।आवश्यकता है अल्पसंख्यक समुदाय के प्रबुद्ध व्यक्ति को आगे आकर इस हॉस्टल को उद्घाटन कराना चाहिए ।अगर वह आगे नहीं आएंगे तो उनकी पीढ़ी शिक्षित नहीं होंगे।आने वाली पीढ़ी शिक्षित व्यक्ति को माफ़ नहीं करेगी। किसी ने डॉ भीमराव अम्बेडकर से पूछा था आप रात भर जागकर क्यों पढ़ते हैं।इस पर डाॅ भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि मैं रात भर इसलिए जागता हूं क्योंकि हमारा समुदाय सोया हुआ ।लेकिन आजादी के बाद अल्पसंख्यक को कोई ऐसा रहनुमा नहीं मिला जो अपने समुदाय को शिक्षित कर उनके पीढ़ियों को मजबूत कर सके ।सिर्फ वोट बैंक की राजनीति ही करते आए हैं और करते रहेंगे। इस अल्पसंख्यक हॉस्टल का सुधि लेने वाला कोई नहीं है।और अभी तक हास्टल धूल फांक रहा है।





