वनरक्षियों ने 2014 के वनरक्षी नियुक्ति नियमावाली में हुए अलाभकारी संशोधन को रद्द करने और लंबित मांगों का यथाशीघ्र पूरा करने की मांग की
सतनाम सिंह
झारखंड राज्य अवर वन सेवा संघ के आह्वान पर वनरक्षियों ने धरना-प्रदर्शन जारी रखा है, जो कि सरकार द्वारा 2014 के वनरक्षी नियुक्ति नियमावाली में किए गए अलाभकारी संशोधन के विरोध में है। वनरक्षियों ने सरकार की उदासीनता से नाराज होकर रांची में धरना-प्रदर्शन, पैदल मार्च, और अन्य आंदोलनों में भाग लेने का फैसला किया है। वनरक्षियों की मांग है कि 2014 के वनरक्षी नियुक्ति नियमावाली में हुए अलाभकारी संशोधन को रद्द किया जाए और उनकी लंबित मांगों का यथाशीघ्र पूरा किया जाए। वनरक्षियों ने कहा है कि वे अल्प वेतन-भत्ते और बिना किसी विशेष सुविधा के जंगलों की सुरक्षा एवं विकास तथा वन्य प्राणियों की सुरक्षा एवं वन्य प्राणियों से लोगों की सुरक्षा सहित अन्य विभागीय कार्यों के लिए दुर्गम स्थानों पर दिन-रात लगे रहते हैं। वनरक्षियों ने सरकार से मांग की है कि उनकी जान-माल की क्षति की संभावना को देखते हुए विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जाए। लेकिन सरकार द्वारा वनरक्षियों के प्रोन्नति के पूर्व से मिले अवसर को ही छिनने का कार्य किया गया है, जिससे वनरक्षी दुःखी और मजबूर महसूस कर रहे हैं। इस बीच, वन अपराध में बेतहाशा वृद्धि हो रही है, जंगली हाथियों का तांडव अपने चरम स्तर तक पहुँच गया है, और वन माफियाओं द्वारा खुलेआम कोयला, लकड़ी, अबरख और पत्थर जंगलों से अवैध रूप से खाना करके निकाले जा रहे हैं।






