राजकुमार भगत
पाकुड़। सूर्य उपासना का महापर्व छठ कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मंगलवार को नहाय खाय के साथ प्रारंभ हो गया है। छठ पर्व पहला 5 नवंबर को नहाए खाए के साथ शुरू हो गया है। छठवर्ती सर्वप्रथम पवित्र नदी या जल में स्नान कर नए वस्त्र धारण करती हैं। छठी मैया को साक्षी मानकर नई मिट्टी के चूल्हे में गोयठा या लकड़ी आंच से शुद्ध घी में कद्दू ( लौकी )की सब्जी सेंधा नमक से बनती हैं। अरवा चावल की भात, चने की दाल आदि बनाई जाती है। इस दिन से प्याज लहसुन वर्जित रहता है। फिर कमल या केले पत्ते में या शुद्ध थाली में छठी मैया को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में छठवर्ती के साथ-साथ घर के सभी सदस्य इस महाप्रसाद को ग्रहण करते हैं। कथा के अनुसार पेट मन वचन और आत्मा की शुद्धि के लिए कद्दू भात खाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। जिसे नहाय खाय के नाम से जाना जाता है।हालांकि यह अलग-अलग स्थान पर अलग-अलग परंपरा के अनुसार इसकी परंपरा बदल जाती है।
आज होगी खरना तैयारी पूरी
पंचमी तिथि को खरना के रूप में मनाया जाता है । इस दिन छात्रवर्ती दिन भर उपवास रहकर संध्या काल में शुद्ध दूध में बना खीर, पीठ्ठा आदि बनाया जाता है। फिर छठी मैया को भोग लगाकर घर के सभी सदस्य प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
तीसरे दिन षष्ठी तिथि , 7 नवंबर को छठवर्ती संध्या काल में अपने-अपने नजदीकी नदी तालाब गंगा आदि में जाकर डुबकी लगाते हुए सूर्य देव की पूजन करते हैं एवं संध्या अर्ध्य देते हैं। सप्तमी तिथि अर्थात 8 नवंबर को उदय कालीन भगवान भास्कर सूर्य देव को पूजन करते हैं एवं उन्हें अर्ध्य देते हैं। इसी के साथ चार दिनों से चला रहा छठ संपन्न हो जाता है। छठी मैया की पूजा अर्चना और अर्घ्य देने से सुख शांति समृद्धि अयोग्य संतान की प्राप्ति होती है।
अर्घ्य देने का समय
6 नवंबर- खरना – दिन सूर्योदय 6: 46 बजे एवं सूर्यास्त 5:26 बजे।
7 नवंबर – संध्या अर्घ्य – सूर्य उदय 6:36 में होगा सूर्य अस्त 5:32 पर होगा। इस दिन डूबते सूरज को अर्घ्य दिया जाएगा।
8 नवंबर- प्रातः अर्घ्य- सूर्योदय 6:40 बजे एवं सूर्यास्त 5:40 बजे । इस दिन प्रातः कालीन सूर्य देव भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया जाएगा।
नोट – ध्यान रहे की हर स्थान का सूर्योदय एवं सूर्यास्त का समय अलग-अलग होता है। अतः छठवर्ती अपने स्थान की जानकारी अपने पंडित जी से प्राप्त करें।
छठ में चढ़ाए जाने वाली प्रसाद
छठ महापर्व को डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व में गेहूं के आटा के बने ठेकुआ अरवा चावल से के बने केचुनिया का बहुत महत्व है इसके अलावे बस की टोकरी सूप लोटा कच्चा दूध गंगाजल गन्ना केला नारियल शकरकंद पान सुपारी हल्दी मूली अदरक बड़ा कमला नींबू ,फल फूल पानी फल सिंघाड़ा गुड आदि प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है।





