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April 27, 2026 2:07 pm

मां विपत्तारिणी की पूजा धूमधाम से संपन्न, व्रती महिलाओं ने मां से मांगी परिवार की सुख-शांति की कामना।

पाकुड़। शनिवार को आषाढ़ मास के पहले शनिवार को मां विपत्तारिणी की पूजा जिले भर के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुई। अलसुबह से ही मंदिरों में व्रती महिलाओं की लंबी कतारें लग गई थीं। सभी ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां की पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-शांति, रक्षा व उन्नति की कामना की। पूजा के दौरान महिलाओं ने 13 प्रकार के फल, फूल, मिठाई और पूजन सामग्री अर्पित की। मां को चढ़ाए गए लाल डोरे में 13 गांठ लगाकर उसे ‘रक्षा कवच’ मानते हुए श्रद्धापूर्वक अपने बांह में बांधा गया। यह अनुष्ठान पंडित दिवाकर मिश्रा की अगुवाई में विधिपूर्वक संपन्न हुआ।
पंडित मिश्रा के अनुसार, हर वर्ष रथयात्रा के बाद आषाढ़ महीने के पहले शनिवार और मंगलवार को मां विपत्तारिणी की पूजा की जाती है। पहले यह पूजा बंगाली समुदाय तक सीमित थी, लेकिन अब इसकी आस्था ने सीमाएं लांघ ली हैं और सभी वर्गों की महिलाएं पूरे श्रद्धा-भाव से इसमें भाग ले रही हैं। पूरे जिले में पूजा को लेकर खासा उत्साह देखा गया। मंदिरों में भक्ति गीतों की ध्वनि, घंटियों की गूंज और आस्था से सराबोर महिलाओं की उपस्थिति ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।

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