वैज्ञानिक खेती से प्रगतिशील किसान बने जामिरुल शेख
पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने से किसान किस प्रकार अपनी आय और सामाजिक स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं, इसका प्रेरणादायक उदाहरण हैं प्रगतिशील किसान श्री जामिरुल शेख। जामिरुल शेख, पिता स्व. शेख लखीपुर, ग्राम लखीपुर, पंचायत रामपुर, प्रखंड महेशपुर, जिला पाकुड़ के निवासी हैं। वे लगभग 1.33 एकड़ सिंचित भूमि पर खेती करते हैं। प्रारंभिक दौर में वे खरीफ में धान तथा रबी में गेहूं, सरसों, चना एवं पारंपरिक सब्जियों की खेती करते थे। उस समय खेती पारंपरिक तरीकों से होने के कारण आय सीमित थी, जिससे परिवार का भरण-पोषण चुनौतीपूर्ण हो गया था।
आत्मा से जुड़ाव ने बदली तस्वीर
वर्ष 2020 में आत्मा, महेशपुर के सहायक तकनीकी प्रबंधक शांतनु कुमार शील के संपर्क में आकर उन्होंने कृषि विभाग से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर खेती करना शुरू किया। इस बदलाव ने न केवल उन्हें एक प्रगतिशील किसान के रूप में पहचान दिलाई, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ।
सब्जी और फल उत्पादन से बढ़ी आमदनी
आज जामिरुल शेख गेहूं-धान के साथ-साथ ब्रोकली, मटर, खीरा, ओल, अदरक, मिर्च सहित विभिन्न उन्नत किस्म की सब्जियों और फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। आत्मा, पाकुड़ के माध्यम से उन्हें 100 प्रतिशत अनुदान पर उन्नत सब्जी बीज उपलब्ध कराया गया। वहीं उद्यान विभाग से मल्चिंग पेपर, वर्मी कम्पोस्ट इकाई एवं कीट-रहित सब्जी उत्पादन इकाई का भी लाभ मिला।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड से वैज्ञानिक खेती को मिला आधार
सहायक तकनीकी प्रबंधक के मार्गदर्शन में श्री शेख ने मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना के अंतर्गत खेत की मिट्टी की जांच कराई। मोबाइल ऐप के माध्यम से मिट्टी नमूना संग्रह कर प्रयोगशाला भेजा गया, जिसके उपरांत उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड (SHC) प्राप्त हुआ। कार्ड में दी गई अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरकों के संतुलित उपयोग से फसल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
समाज के लिए प्रेरणा बने जामिरुल शेख
जामिरुल शेख स्नातक शिक्षित हैं और खेती के प्रति विशेष रुचि रखते हैं। वे समूह गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं और अन्य किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए प्रेरित करते हैं। उनके प्रयासों से गांव में कृषि को लेकर नई सोच और उत्साह का संचार हुआ है।
निष्कर्ष
जामिरुल शेख बताते हैं कि आत्मा, कृषि विभाग एवं उद्यान विभाग के संयुक्त प्रयासों से सीमित भूमि पर भी उत्पादन और आय में वृद्धि संभव हो सकी है। उनकी सफलता की कहानी यह सिद्ध करती है कि सही प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और मेहनत से किसान न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त कर सकते हैं।









