चैनपुर (डाल्टेनगंज): नरसिंहपुर–पथरा क्षेत्र में जमीन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर की भागदौड़ से दूर शांत जीवन की तलाश में कई परिवार गांवों की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन जमीन से जुड़े विवाद और दबाव की राजनीति ने हालात जटिल कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि एक पैतृक भूमि, जो पूर्व में सीता साव के नाम दर्ज थी, उनके वंशजों—विशेषकर विश्वनाथ प्रसाद एवं उनकी पुत्री चंचल लता गुप्ता—से जुड़ी है। परिवार का आरोप है कि पाटीदार (ननिहाल पक्ष) के लोग जमीन पर दावा कर रहे हैं और इस पूरे प्रकरण में स्थानीय स्तर पर दबाव बनाए जाने की बातें सामने आ रही हैं।
परिवार के अनुसार, संबंधित संपत्ति का मामला Supreme Court of India में लंबित है। इसके बावजूद ब्लॉक चैनपुर के अंचल कार्यालय द्वारा जमीन के दाखिल-खारिज/नामांतरण की कार्रवाई कर दिए जाने का आरोप लगाया गया है। इस संदर्भ में चैनपुर के अंचल अधिकारी (सीओ) पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विधायक पर भी आरोप
क्षेत्र के विधायक पर “दबदबा” और “प्रभाव” के इस्तेमाल की चर्चा स्थानीय स्तर पर हो रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विधायक या प्रशासन की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
आरटीआई से खुलासे की उम्मीद
परिवार द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आवेदन दायर किए जाने की बात कही जा रही है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि आरटीआई के जवाब में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या कोर्ट में लंबित मामले के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई की गई है या नहीं।
बड़ा सवाल
यदि मामला वास्तव में सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तो क्या स्थानीय स्तर पर की गई किसी भी प्रकार की प्रशासनिक प्रक्रिया न्यायिक मर्यादा के अनुरूप है?
क्या संबंधित पक्षों को पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिया गया?
और क्या जनप्रतिनिधियों की भूमिका विकास तक सीमित रहनी चाहिए या भूमि विवादों में हस्तक्षेप तक?
इन प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर प्रशासनिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा। फिलहाल, क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।




