निर्दलीय शबरी की नैया पार लगाने वाले पांच पांडव, पति बने सबसे बड़े सारथी
पाकुड़: पाकुड़ नगर निकाय चुनाव ने इस बार सिर्फ अध्यक्ष नहीं चुना, बल्कि सियासत को एक नया संदेश भी दिया। भाजपा से बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरी सबरी पाल ने जीत दर्ज कर यह साबित कर दिया कि जब जनता ठान ले, तो राजनीतिक समीकरण बदलते देर नहीं लगती।सबरी पाल की यह जीत महज़ एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि भरोसे, मेहनत और रणनीति की कहानी है। चुनाव प्रचार के दिनों में जहां एक ओर संसाधनों और संगठन की ताकत थी, वहीं दूसरी ओर सबरी के पास था जनता का सीधा संवाद और जमीनी कार्यकर्ताओं का समर्पण।
छ सच्चे सिपाही जिन्होंने बदली तस्वीर
सबरी पाल ने अपनी जीत का श्रेय छह खास सहयोगियों को दिया। सबसे पहले उनके पति सोमनाथ पाल, जिन्होंने दिन-रात एक कर चुनावी मोर्चा संभाला।इसके बाद पवन भगत, एवरन सिंह गुजराल, प्राची चौधरी और जीतू सिंह—इन सभी ने बूथ प्रबंधन से लेकर रणनीतिक बैठकों तक अहम भूमिका निभाई।एक ऐसे सहयोगी भी रहे, जिनका नाम उन्होंने सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन कहा कि उनकी भूमिका निर्णायक रही।सबरी का कहना है कि इन छह चेहरों के अलावा भाजपा के कई समर्पित कार्यकर्ताओं ने भी पर्दे के पीछे रहकर उनका साथ दिया। वे सामने नहीं आए, लेकिन उनकी मेहनत मेरी ताकत बनी, उन्होंने मुस्कराते हुए कहा।
नोटिस का जवाब ‘जनता का जनादेश: शबरी
पार्टी लाइन से हटकर चुनाव लड़ने पर भाजपा की ओर से मिले स्पष्टीकरण नोटिस पर सबरी ने तीखी लेकिन संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मुझसे जवाब मांगा गया, लेकिन जनता ने मुझे अध्यक्ष बनाकर अपना जवाब दे दिया।यह बयान शहर की सियासत में चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत स्थानीय स्तर पर संगठन बनाम जनसमर्थन की बहस को नई दिशा दे सकती है।
झामुमो में जाने की अटकलों पर विराम
चुनाव परिणाम के बाद उनके झामुमो (JMM) में शामिल होने की चर्चाएं भी तेज हुईं, लेकिन सबरी ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इसे विरोधियों की “राजनीतिक चाल” बताया और कहा कि फिलहाल उनकी ऐसी कोई योजना नहीं है। मैं एक समर्पित कार्यकर्ता हूं और जनता के भरोसे पर खरा उतरना ही मेरी पहली प्राथमिकता है, उन्होंने स्पष्ट किया।
अब फोकस विकास पर: शबरी
सबरी पाल ने कहा कि चुनाव खत्म हो चुका है और अब असली परीक्षा शुरू होती है। शहर की साफ-सफाई, पेयजल, सड़क और पारदर्शी प्रशासन उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
पाकुड़ की जनता ने जिस भरोसे के साथ एक निर्दलीय उम्मीदवार को अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी है, वह स्थानीय राजनीति के लिए एक संदेश है—जनता के दिल तक पहुंचने वाली राजनीति ही अंततः जीतती है। सबरी पाल की यह जीत आने वाले दिनों में पाकुड़ की सियासत को किस दिशा में ले जाएगी, यह वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि इस चुनाव ने शहर में एक नई राजनीतिक कहानी लिख दी है।












