रांची। झारखंड विधानसभा के सत्र के दौरान लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू ने पीडब्ल्यूडी कोर्ट के तहत टेंडर प्रक्रिया में हो रही देरी का मामला प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से स्पष्ट नियम और समय-सीमा तय करने की मांग की। विधायक हेमलाल मुर्मू ने सदन में कहा कि पीडब्ल्यूडी कोर्ट के अंतर्गत आमंत्रित निविदाओं (NIT) के निष्पादन में अनावश्यक देरी हो रही है, जिससे विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि पिछले एक वर्ष और चालू वर्ष में पीडब्ल्यूडी कोर्ट के तहत जारी टेंडरों में से कितने का निष्पादन हुआ और कितने अब भी लंबित हैं। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि लंबित टेंडरों को पीडब्ल्यूडी कोर्ट के अंतर्गत बनाए रखने या उन्हें रद्द कर दोबारा निविदा आमंत्रित करने के लिए वर्तमान में क्या नियम लागू हैं।
हेमलाल मुर्मू ने कहा कि मौजूदा प्रावधानों के अनुसार 5 करोड़ रुपये तक की योजनाओं का निष्पादन सक्षम प्राधिकार द्वारा किया जाता है, जबकि 5 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं पर अभियंता प्रमुख की अध्यक्षता में गठित निविदा समिति निर्णय लेती है। निविदा प्रक्रिया में तकनीकी रूप से योग्य और न्यूनतम दर देने वाले निविदादाता को कार्य आवंटित किया जाता है, लेकिन तकनीकी मूल्यांकन और अन्य प्रक्रियाओं में अत्यधिक विलंब के कारण योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में देरी से एक ओर राज्य को विकास कार्यों में नुकसान होता है, वहीं दूसरी ओर निविदा में भाग लेने वाले ठेकेदारों को भी आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है। इसलिए तकनीकी मूल्यांकन और टेंडर निष्पादन के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करना जरूरी है। इस पर जवाब देते हुए ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि विभाग द्वारा टेंडर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। जहां भी प्रक्रियागत कमियां सामने आई हैं, वहां संबंधित समितियों को भंग कर नई जिम्मेदार टीम का गठन किया गया है। साथ ही लंबित टेंडरों के शीघ्र निष्पादन के लिए भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि जनहित और राज्यहित को ध्यान में रखते हुए टेंडर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि पीडब्ल्यूडी कोर्ट के मौजूदा प्रावधान वर्तमान परिस्थितियों में प्रभावी नहीं हैं तो उनकी समीक्षा कर आवश्यक संशोधन या नया प्रावधान लागू किया जाना चाहिए, ताकि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जा सके।
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