झारखंड विधानसभा में बुधवार को जो नज़ारा देखने को मिला, वह कम और राजनीति का मंच ज्यादा लग रहा था। रामनवमी जैसे पवित्र पर्व के नाम पर शोर-शराबा तो खूब हुआ, लेकिन सच की आवाज़ शायद उस शोर में दब गई।
भारतीय जनता पार्टी के विधायक डीजे प्रतिबंध को लेकर ऐसे आक्रोशित दिखे मानो यह फैसला सरकार की मर्जी से हुआ हो, जबकि हकीकत यह है कि देर रात तेज आवाज़ वाले डीजे पर रोक का निर्देश पहले ही सुप्रीम कोर्ट दे चुका है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब नियम पूरे देश के लिए समान है, तो फिर सदन में इतना शोर किस बात का?
वहीं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने शांत स्वर में यह याद दिलाया कि देश इस समय महंगाई और बढ़ती कीमतों जैसी असली समस्याओं से जूझ रहा है। लेकिन लगता है कि कुछ नेताओं को इन मुद्दों से ज्यादा दिलचस्पी शोर मचाने में है।
कभी-कभी ऐसा लगता है कि सदन में बहस कम और राजनीति का प्रदर्शन ज्यादा हो रहा है—जहाँ समाधान से ज्यादा सुर्खियाँ बटोरना ही असली लक्ष्य बन गया है।






