सुविधा मिली लेकिन सवाल बरकरार—बंद ट्रेनों की वापसी और स्टेशन की बदहाली पर जवाब नहीं।
पाकुड़। वर्षों से उठ रही मांग के बीच आखिरकार पाकुड़ रेलवे स्टेशन को बड़ी सौगात मिली है। अब 12041/12042 हावड़ा–न्यू जलपाईगुड़ी शताब्दी एक्सप्रेस और 22611/22612 सेंट्रल जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस का ठहराव यहां शुरू कर दिया गया है। इससे पाकुड़ समेत आसपास के इलाकों के यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा में बड़ी राहत मिलेगी और सीधी रेल सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इस नई सुविधा का उद्घाटन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने ऑनलाइन माध्यम से किया। वहीं हावड़ा डिवीजन के डीआरएम विशाल कपूर ने स्टेशन परिसर में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की और ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान स्टेशन परिसर में भारी भीड़ उमड़ी और यात्रियों में उत्साह साफ नजर आया।
डीआरएम ने कहा कि यह ठहराव लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम है और इससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर रेल सुविधा मिलेगी। साथ ही आवागमन पहले से अधिक सुगम होगा और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस उपलब्धि के साथ कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोविड-19 और लॉकडाउन के दौरान बंद हुई कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को अब तक चालू नहीं किया गया है। जब इस संबंध में अधिकारियों से सवाल किया गया तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।
यात्रियों ने स्टेशन की मौजूदा स्थिति पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। शौचालयों की स्थिति खराब है, साफ-सफाई का अभाव है और महिला यात्रियों के लिए अलग व बेहतर शौचालय की सुविधा अब तक नहीं हो पाई है। दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर जैसी जरूरी व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों के दौरे के दौरान ही कई सुविधाएं अस्थायी रूप से शुरू की जाती हैं, जो बाद में बंद हो जाती हैं। स्टेशन पर शुरू की गई लिफ्ट को लेकर भी ऐसा ही अंदेशा जताया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शताब्दी जैसी सुपरफास्ट ट्रेन का ठहराव जरूर मिला है, लेकिन इसका लाभ सीमित लोगों को ही मिल पाएगा। उनकी पुरानी मांगों में पाकुड़ से दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन, मालदा–बर्दवान पैसेंजर और हावड़ा–वाराणसी रूट की ट्रेन शामिल रही हैं, जिन पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं दिखी है। कुल मिलाकर, पाकुड़ को नई ट्रेनों का ठहराव जरूर मिला है, लेकिन यात्रियों की उम्मीदें अभी पूरी तरह पूरी नहीं हुई हैं। अब नजर इस बात पर है कि बंद ट्रेनों की बहाली और स्टेशन की बुनियादी सुविधाओं में सुधार कब तक होता है।







