“हर महीने लाखों की कमाई का खेल?”—जूट बोरा हेराफेरी पर सामाजिक कार्यकर्ता का बड़ा खुलासा।
पाकुड़ जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़े एक संभावित बड़े घोटाले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार अग्रवाल ने प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उनका सीधा सवाल है—एफसीआई से आने वाले जूट के खाली बोरे आखिर जा कहां रहे हैं? सुरेश अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि खाद्यान्न वितरण के बाद बचने वाले इन बोरों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि अनाज सही तरीके से लाभुकों तक पहुंचाया गया है, तो खाली बोरों का हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने आशंका जताई कि इस पूरे मामले में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) और सहायक गोदाम प्रबंधक की मिलीभगत हो सकती है। अग्रवाल के मुताबिक, इन जूट बोरों को खुले बाजार में बेचकर हर महीने 3 से 4 लाख रुपये तक की अवैध कमाई की जा रही है। सुरेश अग्रवाल ने लिट्टीपाड़ा समेत जिले के सभी छह प्रखंडों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर बीते वर्षों के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच हो, तो करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो इस मुद्दे को जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा। अब इस खुलासे के बाद जिले में हलचल तेज हो गई है और लोगों की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यही है—क्या इस बार सच सामने आएगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?





