अमर भगत
पाकुड़। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बीजीआर माइनिंग एंड इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड ने पचवारा नॉर्थ कोल माइंस परियोजना क्षेत्र में व्यापक पर्यावरण एवं सामुदायिक विकास कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान कंपनी ने 50 हेक्टेयर क्षेत्र में 78,500 पौधों के रोपण, 3,400 फलदार पौधों के वितरण तथा धुआँरहित बायोमास चूल्हा अभियान की शुरुआत की। कार्यक्रम का शुभारंभ झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय पदाधिकारी अमुल कुमार सोरेन ने वृक्षारोपण कर किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग की दिशा में कंपनी की पहल की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान परियोजना प्रभावित नौ गांवों के ग्राम प्रधानों, आलूबेड़ा पंचायत की मुखिया, प्रमुख एवं अन्य ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच 20 थर्मल एफिशिएंट लकड़ी एवं बायोमास चूल्हों का वितरण किया गया। ग्रामीणों को चूल्हों के संचालन और उपयोग की जानकारी देते हुए इसका प्रदर्शन भी किया गया।
कंपनी के अनुसार यह चूल्हा पारंपरिक मिट्टी के चूल्हों की तुलना में 65 प्रतिशत कम लकड़ी की खपत करता है तथा 70 प्रतिशत कम धुआँ उत्सर्जित करता है। इससे भोजन जल्दी पकता है और ईंधन की भी बचत होती है। कंपनी ने भविष्य में प्रत्येक परियोजना प्रभावित परिवार को एक-एक चूल्हा उपलब्ध कराने की घोषणा की। विश्व पर्यावरण दिवस के पूर्व आयोजित सामुदायिक वृक्षारोपण एवं आजीविका सहायता कार्यक्रम के तहत कंपनी ने 3,400 फलदार पौधों का वितरण किया। प्रत्येक परिवार को आम, कटहल, सीताफल, चीकू, आंवला और नींबू सहित पांच फलदार पौधे दिए गए। कंपनी ने आगामी वर्षों में प्रतिवर्ष 50 हजार फलदार पौधों के वितरण का संकल्प भी दोहराया। कार्यक्रम में डब्ल्यूबीपीडीसीएल के महाप्रबंधक रामाशीष चटर्जी, शार प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के उपाध्यक्ष दिलीप तामन, बीजीआर माइनिंग के महाप्रबंधक (सीएसआर) संजय बेसरा, आलूबेड़ा पंचायत की मुखिया सारती मरांडी, प्रमुख जूहीप्रिया मरांडी, परियोजना प्रभावित गांवों के ग्राम प्रधान तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और सतत आजीविका को बढ़ावा देने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।








