डीएमएफटी के 59 स्कूलों में शौचालय-स्नानागार निर्माण का मामला, संवेदकों ने प्रक्रिया पर उठाई उंगली
पाकुड़। डीएमएफटी की राशि से सरकारी स्कूलों और कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में शौचालय-स्नानागार निर्माण के लिए निकाली गई निविदा को लेकर शिक्षा विभाग सवालों के घेरे में है। निविदा संख्या 30 और 32 की शर्तों को लेकर स्थानीय संवेदकों ने आपत्ति जताते हुए नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। खास तौर पर 50 लाख रुपए से कम लागत वाले कार्य में डबल बिड रखने और बीओक्यू की कीमत 5 हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपए किए जाने पर संवेदकों ने सवाल उठाए हैं।
59 स्कूलों में होना है निर्माण
डीएमएफटी मद से पाकुड़िया, अमड़ापाड़ा और लिट्टीपाड़ा प्रखंड के 59 सरकारी विद्यालयों में शौचालय सह स्नानागार का निर्माण प्रस्तावित है। प्रत्येक इकाई पर करीब 8.19 लाख रुपए खर्च किए जाने हैं। वहीं छह प्रखंडों के कस्तूरबा विद्यालयों में प्रति विद्यालय करीब 49.98 लाख रुपए की लागत से निर्माण कराया जाना है।
डबल बिड और बढ़ी फीस बनी विवाद की वजह
संवेदकों का कहना है कि 50 लाख रुपए से कम लागत वाले कार्यों में सिंगल बिड की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके बावजूद निविदा में डबल बिड की शर्त रखी गई है। उनका आरोप है कि इससे छोटे संवेदकों के लिए प्रक्रिया कठिन होगी। इसके अलावा 15 से 50 लाख रुपए तक के कार्यों में सामान्यत: 5 हजार रुपए बीओक्यू शुल्क होने का दावा करते हुए संवेदकों ने यहां 10 हजार रुपए शुल्क निर्धारित किए जाने पर भी आपत्ति जताई है।
विभाग ने बताया तकनीकी त्रुटि
मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अनीता पुरती ने तकनीकी जानकारी के लिए सहायक अभियंता से संपर्क करने की बात कही। सहायक अभियंता नंद कुमार ने बताया कि कस्तूरबा विद्यालयों के निर्माण के लिए 53.86 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हुई थी। बाद में अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता स्तर से बीओक्यू का प्राक्कलन 49.98 लाख रुपए दिया गया। उनके अनुसार, इसी प्रक्रिया में तकनीकी त्रुटि के कारण निविदा में यह स्थिति बनी है।
9 को अंतिम तिथि, 14 को खुलेगा टेंडर
निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 9 अक्टूबर निर्धारित है, जबकि निविदा 14 अक्टूबर को खोली जाएगी। निविदा की शर्तों को लेकर संवेदकों में नाराजगी है। मामला अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक भी पहुंच गया है। संवेदकों ने पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर नियमों के अनुरूप निविदा कराने की मांग की है।






