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October 13, 2026 12:19 am

हॉस्टल में बच्ची की मौत, इलाज के लिए झोलाछाप के पास ले गए थे संचालक।

बाड़ू स्थित मिशन इंडिया मूवमेंट हॉस्टल की घटना, बच्चों की देखरेख पर उठे सवाल।

प्रशांत मंडल

लिट्टीपाड़ा (पाकुड़)। लिट्टीपाड़ा थाना क्षेत्र के बाड़ू स्थित मिशन इंडिया मूवमेंट हॉस्टल में रविवार देर रात आठ वर्षीय बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बच्ची की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। हॉस्टल पहुंचने पर उन्होंने प्रबंधन के प्रति नाराजगी जताई। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों को शांत कराया। मृत बच्ची की पहचान साहिबगंज जिले के तालझारी थाना क्षेत्र के बेहड़ा पहाड़ गांव निवासी जाबरा पहाड़िया की पुत्री रजनी पहाड़िन के रूप में हुई है। पिता के अनुसार, रजनी पिछले नौ महीने से हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने बेहतर शिक्षा देने का भरोसा दिया था, लेकिन बच्ची का नामांकन पास के सरकारी विद्यालय में कराया गया था, जो हॉस्टल से करीब तीन किलोमीटर दूर है। बेटी की मौत का कारण पूछने पर प्रबंधन ने बीमारी की बात कही।

तबीयत बिगड़ने पर कराया इलाज, रात में हुई मौत।

हॉस्टल के मैनेजर सुलेमान मालतो ने बताया कि रविवार शाम अचानक रजनी की तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद रांगा के एक झोलाछाप डॉक्टर से उसका इलाज कराया गया। रात करीब दस बजे बच्ची की मौत हो गई। मैनेजर के अनुसार, घटना की सूचना परिजनों को रात में ही दे दी गई थी। उन्होंने बताया कि हॉस्टल वर्ष 2024 से संचालित है। यहां पाकुड़ और साहिबगंज जिले के 80 छात्र-छात्राएं रहते हैं। इनमें 20 बच्चों का नामांकन प्राथमिक विद्यालय बाड़ू, 50 का उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय बाड़ू और 10 का उत्क्रमित मध्य विद्यालय महुलबोना में कराया गया है।

हॉस्टल की व्यवस्था पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल।

घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब बच्चों को सरकारी विद्यालयों में ही पढ़ाई करनी है, तो उन्हें दूर-दराज के गांवों से लाकर हॉस्टल में रखने की क्या जरूरत है। बच्चों की स्वास्थ्य सुविधा और देखरेख की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। घटना की सूचना पर पुलिस इंस्पेक्टर अनूप रौशन भेंगरा, सीओ पवन कुमार और थाना प्रभारी नागेंद्र कुमार पुलिस बल के साथ हॉस्टल पहुंचे। थाना प्रभारी ने बताया कि परिजनों ने लिखित रूप से पोस्टमार्टम नहीं कराने और प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं करने का आग्रह किया था। इसके बाद शव बिना पोस्टमार्टम कराए परिजनों को सौंप दिया गया। बच्ची की मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि नहीं हुई है।

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