पॉक्सो एक्ट, बाल श्रम और बच्चों के अधिकारों पर अधिकारियों ने किया जागरूक; गलत स्पर्श या व्यवहार पर चुप नहीं रहने की दी सलाह।
राजकुमार भगत
पाकुड़। बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और बाल विवाह, बाल श्रम, यौन शोषण तथा साइबर अपराध जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाने के उद्देश्य से शुक्रवार को सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस गर्ल्स, पाकुड़ में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। झालसा, रांची के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं को कानूनी अधिकारों, सुरक्षा उपायों और अपराध की स्थिति में उपलब्ध सहायता की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में डालसा सचिव रूपा बंदना किरो, स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष अशोक कुमार शुक्ला, एसडीपीओ कुमार गौरव, जिला शिक्षा पदाधिकारी अनीता पूर्ति तथा विद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनीष गुप्ता मुख्य रूप से उपस्थित थे। डालसा सचिव रूपा बंदना किरो ने छात्राओं को बाल विवाह के दुष्परिणाम, बाल मजदूरी और विशेष रूप से पॉक्सो (POCSO) एक्ट के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करने के लिए पॉक्सो कानून बनाया गया है। उन्होंने अच्छे और बुरे स्पर्श के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि किसी भी प्रकार का असहज या गलत व्यवहार महसूस होने पर चुप नहीं रहना चाहिए। इसकी जानकारी तत्काल अभिभावक, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को दें। आपात स्थिति में चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर संपर्क करें। उन्होंने डालसा के माध्यम से मिलने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता की प्रक्रिया भी समझाई। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष अशोक कुमार शुक्ला ने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को जीने और शिक्षा सहित कई महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं। बाल श्रम कानून के तहत बच्चों से प्रतिबंधित परिस्थितियों में काम कराना अपराध है। वहीं, 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कारखानों और खतरनाक कार्यों में नियोजित करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने शिक्षकों से भी अपील की कि विद्यार्थियों को समय-समय पर संविधान की प्रस्तावना और उसके महत्वपूर्ण अनुच्छेदों की जानकारी दें, ताकि उनमें अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति समझ विकसित हो सके।
एसडीपीओ कुमार गौरव ने साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के प्रति छात्राओं को सतर्क किया। उन्होंने अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, अज्ञात स्रोत से फोटो और वीडियो डाउनलोड करने से बचने तथा बैंक खाते, पासवर्ड और ओटीपी जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध के तरीकों की जानकारी देते हुए सतर्कता को ही बचाव का महत्वपूर्ण उपाय बताया।
जिला शिक्षा पदाधिकारी अनीता पूर्ति ने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति सजग और आत्मनिर्भर बनाना है। बाल विवाह, बाल श्रम और साइबर अपराध जैसी घटनाओं से बचने के लिए जागरूकता जरूरी है। बच्चे जागरूक और मजबूत होंगे, तभी समाज में ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
कार्यक्रम का संचालन इंडियन नेशनल एसोसिएशन के अध्यक्ष जेडएच विश्वास ने किया। उन्होंने भी सुरक्षित बचपन अभियान के उद्देश्यों और बच्चों के अधिकारों पर प्रकाश डाला। अंत में विद्यालय परिसर में अधिकारियों एवं उपस्थित लोगों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता का संदेश दिया। प्राचार्य डॉ. मनीष गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
मौके पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्राएं, पैरा लीगल वॉलंटियर्स मिलन कुमार मंडल, पिंकी मंडल, खुदू राजवंशी, नीरज कुमार राउत सहित अन्य लोग उपस्थित थे।







