पाकुड़ पुलिस की जांच में जो ट्रक थे ‘पास’, बंगाल में वे कैसे हो गए ‘फेल’?
पाकुड़: झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा पर जारी बालू के खेल में एक ऐसा अजीबो-गरीब मोड़ आ गया है, जिसने पाकुड़ जिला पुलिस की कार्यशैली को गहरे संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है। मामला केवल तस्करी का नहीं, बल्कि दो राज्यों की पुलिस और प्रशासन के दावों के बीच पैदा हुए एक बड़े विरोधाभास का है।हैरान करने वाली बात यह है कि जो गाड़ियां झारखंड की सीमा में पाकुड़ पुलिस के लिए बिल्कुल ‘दूध की धुली’ थीं, वे सीमा पार करते ही बंगाल प्रशासन की नजर में ‘गुनहगार’ हो गईं।
पाकुड़ में ‘क्लीन चिट’, सीमा पार होते ही ‘जुर्माना’
इस पूरे मामले में असली ट्विस्ट तब आया जब महेशपुर थाना प्रभारी रवि कुमार ने इस लापरवाही के आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ी। थाना प्रभारी ने दैनिक जागरण को बताया कि पुलिस सो नहीं रही थी, बल्कि गाड़ियों की बकायदा जांच की गई थी।थाना प्रभारी रवि कुमार ने कहा हमारे यहां पर इन वाहनों की सघन जांच की गई थी। जांच के दौरान वाहनों के पास वैध चालान मौजूद थे और गाड़ियां नियमों के मुताबिक अंडरलोड थीं।
क्या है मामला?
पाकुड़ जिले के महेशपुर थाना होते हुए जैसे ही ये ‘वैध’ गाड़ियां पाकुड़ के महेशपुर को पार कर पश्चिम बंगाल के मुरारई-1 ब्लॉक की सीमा में दाखिल हुईं, वहां के बीडीओ, भूमि सुधार विभाग और मुरारई थाने की संयुक्त टीम ने इन्हें दबोच लिया।बंगाल प्रशासन ने इन पर अवैध चालान का आरोप लगाते हुए ट्रकों को जब्त कर लिया और एक लाख रुपये (50-50 हजार) का भारी जुर्माना ठोक दिया।
आखिर किसका दावा सच्चा, किसका झूठा?
थाना प्रभारी के इस बयान ने पूरी कहानी को एक नया मोड़ दे दिया है और अब कई गंभीर सवाल तैर रहे हैं:सवाल नंबर 1:अगर सोनारपाड़ा चेकपोस्ट पर गाड़ियों के पास वैध चालान थे, तो सीमा पार करते ही बंगाल प्रशासन ने उन्हें ‘अवैध चालान’ के आरोप में क्यों पकड़ा? क्या वे चालान फर्जी थे जिनकी पहचान पाकुड़ पुलिस नहीं कर पाई?सवाल नंबर 2: अगर झारखंड में गाड़ियां ‘अंडरलोड’ थीं, तो बंगाल जाते ही उन पर इतना भारी जुर्माना किस आधार पर लगाया गया?सवाल नंबर 3: क्या वाहन मालिक द्वारा महेशपुर पुलिस को क्लीन चिट देकर गुमराह किया गया, या फिर जांच के नाम पर खानापूर्ति हुई?








