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July 6, 2026 10:02 pm

70 डिसमिल जमीन पर कब्जा, मुआवजा 10 डिसमिल का! बाबूलाल ने सरकार से मांगा जवाब।

पाकुड़। चंडालमारा-पाखरिया सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण में कथित गड़बड़ी को लेकर झारखंड की राजनीति फिर गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने दावा किया है कि सरकारी रिकॉर्ड में केवल 10 डिसमिल भूमि अधिग्रहण दर्शाया गया है, जबकि अंचल अधिकारी की जांच में करीब 70 डिसमिल जमीन सड़क निर्माण में उपयोग किए जाने की पुष्टि हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मामले में हस्तक्षेप कर प्रभावित रैयतों को उनका लंबित वैधानिक मुआवजा दिलाने की मांग की है। सोशल मीडिया पर जारी बयान में मरांडी ने कहा कि भूमि अधिग्रहण में विसंगति की शिकायत के बाद 14 सितंबर 2018 को जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, पाकुड़ ने पथ प्रमंडल को दोबारा जांच कराने और आवश्यकता पड़ने पर शेष भूमि के अधिग्रहण के लिए नई अधियाचना भेजने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद वर्षों बाद भी प्रभावित रैयतों को पूरी अधिग्रहित भूमि का मुआवजा नहीं मिल सका।
मरांडी के अनुसार, प्रभावित रैयत गणेश मंडल ने पिछले छह महीनों में उपायुक्त, पाकुड़ को तीन अलग-अलग आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और लंबित मुआवजे के भुगतान की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि विभागीय जांच और सरकारी पत्राचार के बावजूद पीड़ितों को उनका अधिकार नहीं मिलना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला है।
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और प्रभावित रैयतों को शीघ्र मुआवजा दिलाने का निर्देश देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित इस मामले का जल्द समाधान होना चाहिए, ताकि किसानों को न्याय मिल सके।

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