चैनपुर: अंचल क्षेत्र में एक पुश्तैनी जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। महज 22 डिसमिल जमीन को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब आरोप-प्रत्यारोप और प्रशासनिक सवालों तक पहुंच गया है।
पीड़ित पक्ष के विक्रम राम के पुत्र अरविंद राम का दावा है कि उक्त जमीन उन्हें अनुदान बास्केट पर्चा के माध्यम से प्राप्त हुई थी, जो पहले खतीयानी भूमि थी। उनके अनुसार, लगान नहीं भरे जाने के कारण यह जमीन नीलामी में गई थी, जिसे अंततः नबू मियां ने खरीदा और बाद में उनके परिवार को प्राप्त हुई। वर्तमान में उनका परिवार 9 डिसमिल जमीन पर रह रहा है, जबकि बाकी 13 डिसमिल जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।जिसका खाता नंबर – 7, प्लॉट संख्या – 276, रकबा – 0.22 डिसमिल
वहीं दूसरे पक्ष के इंद्रजीत राम (पिता: मनोज राम) का कहना है कि उन्हें चैनपुर अंचल कार्यालय के सर्किल ऑफिसर (CO) द्वारा जमीन पर काम करने का आदेश दिया गया है। हालांकि, जब उनसे जमीन के कागजात दिखाने को कहा गया तो उन्होंने साफ इनकार करते हुए कहा कि कागजात वे पहले ही CO को दिखा चुके हैं और किसी अन्य को नहीं दिखाएंगे।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब पीड़ित पक्ष थाने पहुंचा, लेकिन वहां से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं अंचल कार्यालय में पूछताछ करने पर अधिकारियों ने मामले की जानकारी होने की बात तो स्वीकारी, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
स्थानीय मुखिया ने भी यह स्वीकार किया कि जमीन पर काम करने का आदेश CO द्वारा दिया गया है, लेकिन जब उनसे मौके पर चलकर स्थिति देखने की बात कही गई तो उन्होंने जाने से इनकार कर दिया।
टकराव की स्थिति, आंदोलन की चेतावनी
अरविंद राम का आरोप है कि कई दिनों से वे न्याय के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे अंचल कार्यालय का घेराव करने की योजना बना रहे थे, लेकिन सीo ओo के अस्वस्थ होने के कारण फिलहाल आंदोलन टाल दिया गया। इस मामले को स्थानीय विधायक आलोक चौरसिया के समक्ष भी रखा गया है।
बड़ा सवाल
* क्या बिना सार्वजनिक रूप से कागजात दिखाए किसी को जमीन पर काम करने का आदेश दिया जा सकता है?
* क्या प्रशासन की भूमिका इस विवाद को बढ़ाने में है?
* क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए?
चैनपुर अंचल में यह मामला सिर्फ एक जमीन विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। जरूरत है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि किसी बड़े विवाद या हिंसा को रोका जा सके।


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