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September 27, 2026 10:14 am

तपती गर्मी में ‘देसी फ्रिज’ बना राहत का सहारा, बाजारों में मिट्टी के घड़ों की जबरदस्त मांग।

बिजली संकट और बढ़ती महंगाई के बीच मटकों की बिक्री तेज, कुम्हारों को मिला मौसमी संजीवनी

गर्मी का पारा चढ़ते ही बाजारों और साप्ताहिक हाटों में देसी फ्रिज यानी मिट्टी के घड़ों की मांग तेजी से बढ़ गई है। मंगलवार और शनिवार को लगने वाले हाटों में इन दिनों मिट्टी के बर्तनों की बिक्री में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। लोग गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में मिट्टी के घड़े और अन्य बर्तन खरीद रहे हैं। मटके का पानी न सिर्फ ठंडा रहता है, बल्कि उसका स्वाद भी सामान्य पानी की तुलना में अधिक बेहतर माना जाता है। यही वजह है कि हर वर्ग के लोग इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए कुम्हार भी अलग-अलग डिजाइन और आकार के घड़े तैयार कर रहे हैं। हालांकि, कच्चे माल और अन्य खर्चों में बढ़ोतरी के कारण घड़ों की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। वर्तमान में एक घड़े की कीमत 100 से 400 रुपए तक है।
कुम्हारों का कहना है कि यह उनका पैतृक व्यवसाय है और सालभर वे हाट-बाजारों में मिट्टी के बर्तन बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पहले की तुलना में इस पेशे में आमदनी कम हुई है, लेकिन गर्मी के मौसम में बिक्री बढ़ने से कुछ राहत मिलती है। बिजली की अनियमित आपूर्ति भी देसी फ्रिज की मांग बढ़ने की एक बड़ी वजह है। ऐसे में कम खर्च में ठंडा पानी पाने के लिए लोग फिर से पारंपरिक विकल्पों की ओर लौट रहे हैं।

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