सुहागिनों ने मां को सिंदूर अर्पित कर मांगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद, अगले बरस फिर आने की कामना के साथ संपन्न हुआ दुर्गोत्सव
पाकुड़। विजयादशमी पर बुधवार को पाकुड़ में मां दुर्गा की विदाई के दौरान आस्था, उल्लास और भावुकता का अनूठा संगम देखने को मिला। पूजा पंडालों में सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाई। मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने के बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। सिंदूर खेला के दौरान महिलाओं के चेहरों पर उत्सव की खुशी थी, तो मां की विदाई के वक्त आंखें नम हो गईं। बंगाली परंपरा से जुड़े इस अनुष्ठान में सुहागिनें मां दुर्गा से अपने परिवार पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करती हैं। पूजा-अर्चना और पारंपरिक रस्मों के बाद विभिन्न पूजा पंडालों से मां की विदाई और विसर्जन की प्रक्रिया शुरू हुई। नौ दिनों तक भक्ति और उत्साह से गुलजार रहे पूजा पंडालों में विदाई के समय एक ही भाव गूंजता रहा—मां, अगले बरस फिर आना। सिंदूर खेला मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और सुहाग की मंगलकामना का प्रतीक है। इस परंपरा में महिलाएं मां को सिंदूर अर्पित कर उनके आशीर्वाद की कामना करती हैं।
मां की विदाई का पल भावुक कर देता है। मां से सभी की खुशहाली की कामना करते हुए अगले वर्ष उनके फिर आगमन की प्रतीक्षा करते हैं।









