दोनों आरोपियों के विरुद्ध हत्या के प्रयास, मारपीट एवं गाली-गलौच के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार की मांग
दुुमका से बिनोद सारस्वत
दुमका :दुमका के वरिष्ठ पत्रकार मृत्युंजय पांडेय के साथ हंसडीहा थाना प्रभारी एवं उसके निजी चालक द्वारा की गई कथित बेरहमी से मारपीट, दुर्व्यवहार तथा पत्रकार नितेश वर्मा के साथ हुई बदसलूकी के विरोध में मंगलवार को दुमका पत्रकार परिषद के तत्वावधान में पुराना समाहरणालय परिसर में एकदिवसीय धरना एवं प्रदर्शन आयोजित किया गया। धरना की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार सुमन सिंह ने की।
धरना में जिला मुख्यालय सहित विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे पत्रकारों ने घटना की कड़ी निंदा की। इस दौरान पत्रकारों ने मामले में दुमका के पुलिस अधीक्षक पीताम्बर सिंह खेरवार द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई तथा आरोपी थाना प्रभारी के निलंबन एवं विभागीय कार्रवाई का स्वागत करते हुए आभार भी प्रकट किया।
धरना-प्रदर्शन के उपरांत पत्रकारों ने उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक के नाम से संबोधित एक ज्ञापन मौके पर प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से घटना की प्रकृति और गंभीरता को रेखांकित करते हुए आरोपी थाना प्रभारी ताराचंद एवं उसके निजी चालक के आपराधिक कृत्य के मद्देनजर कठोर कार्रवाई की मांग की गई। पत्रकारों ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध हत्या के प्रयास, मारपीट एवं गाली-गलौच के आरोप में बीएनएस की सुसंगत गैर-जमानती धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर अविलंब गिरफ्तारी, मामले की उच्चस्तरीय जांच तथा आरोपियों की संपत्ति की जांच कराने की मांग की। साथ ही भविष्य में किसी भी पत्रकार के साथ ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सभी पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने की भी मांग की गई।
धरना को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार सुमन सिंह ने कहा कि पत्रकार समाज का आईना होता है और दिन-रात मेहनत कर सरकार के सकारात्मक कार्यों के साथ-साथ जनहित से जुड़ी समस्याओं को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी पत्रकार अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है, लेकिन जब किसी पत्रकार पर संकट आता है तो वह खुद को अकेला महसूस करता है। उन्होंने कहा कि मृत्युंजय पांडेय के साथ हुई घटना के बाद पत्रकारों को अपनी एकजुटता और मजबूत करनी होगी। इस घटना के बाद पत्रकारों की एकजुटता की वजह से पुलिस ने तत्परता दिखाई। आरोपी थाना प्रभारी का निलंबन स्वागत योग्य है, लेकिन पत्रकारों की सुरक्षा और हित को लेकर सरकार व प्रशासन को ठोस नीति और कदम उठाने होंगे।
वहीं पीड़ित पत्रकार मृत्युंजय पांडेय ने 27 दिसंबर की रात थाना प्रभारी ताराचंद एवं उसके निजी चालक द्वारा की गई शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की आपबीती साझा करते हुए कहा कि यदि पुलिस अधीक्षक द्वारा समय रहते कार्रवाई नहीं की गई होती, तो उनकी जान को भी खतरा हो सकता था।
सभा को राजेश पांडेय, पंचम झा, कुमार प्रभात, विजय तिवारी, राहुल गुप्ता, अमरेंद्र सुमन, मणि चयन मिश्र, राकेश चंदन, साबिर अंसारी आदि ने संबोधित किया।
मंच संचालन वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विकास साह ने किया।
मौके पर राजकुमार उपाध्याय, पवन घोष, अनूप श्रीवास्तव, रविकांत सुमन, बिक्रमादित्य पाण्डेय, सुबीर चटर्जी, राकेश कुमार मुन्ना, पंकज भंडारी, दिलदार अंसारी, रामजी साह, अशोक राउत, बिनोद सारस्वत बसंत भालोटिया, मो. मारूफ, मो. हारून, सद्दाम हुसैन, भानु प्रताप सिंह, नित्यानंद बक्शी, जी. सिंह, सुशील कुमार झा, आशीष चन्दन, अमित बरियार, शैलेन्द्र राय, संदीप कुमार राम, मनोज कुमार, विजय कुमार समेत बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित थे।






