कुजू। बाल विद्या मंदिर, आरा में शनिवार को धूमधाम से शिक्षक दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सर्वप्रथम डॉ एस० राधा कृष्णन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई।


मौके पर अपने संबोधन में प्राचार्य रंजीत कुमार सिंह ने कहा कि 5 सितंबर 1888 को तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के अंतर्गत तिरुत्तनी नामक ग्राम में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था। इनका यह गांव भगवान मुरूगन के प्रसिद्ध मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध है। दक्षिण भारत में भक्तों के बीच भगवान मुरूगन की विशेष आस्था है। भगवान मुरूगन भगवान शंकर एवं मां पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय के रूप में भी जाने जाते हैं। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के प्रथम राजदूत भी रहे हैं। तत्पश्चात 1952 से 1962 तक भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति के रूप में भी इन्होंने अपनी सेवा दी। वहीं 1962 से 1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने रहे। आज से करीब 137 वर्ष पूर्व जन्म लिए डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन आज भी सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहे हैं। आगे श्री सिंह ने कहा कि शिक्षक केवल किताबी ज्ञान नहीं देते बल्कि विद्यार्थियों में नैतिकता एवं अनुशासन को भी मजबूत करते हैं। आज शिक्षक दिवस गुरु परंपरा का प्रतीक माना जाता है।


मौके पर विद्यार्थियों द्वारा अपने गुरुजनों के स्वागत में कई रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर शिक्षक दिवस की शोभा बढ़ाने का काम किया। वहीं विद्यार्थियों द्वारा आयोजित शिक्षकों के लिए सरप्राइज खेल का भी आयोजन हुआ। मौके पर सीसीएल के एस.ओ. पी सुमित कुमार, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष- रति महतो, सचिव- नेमधारी महतो, यूनियन नेता, वाहिद अंसारी, अनिल कुमार तिवारी समेत तभी शिक्षक/शिक्षिकाओं मौजूद रहे। मंच संचलन रानी कुमारी एवं नाजिश ने की।





