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October 15, 2026 10:49 pm

जमानत के बाद भी जेल में बंद कैदियों के मामलों की समीक्षा, 15 बंदियों की हुई पहचान।

बीमार, बुजुर्ग और जमानतदार नहीं मिलने से जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को राहत देने पर जोर।

पाकुड़। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर गुरुवार को व्यवहार न्यायालय, पाकुड़ में विचाराधीन कैदी समीक्षा समिति की चौथी बैठक आयोजित की गई। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष दिवाकर पांडेय की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंडल कारा में बंद विचाराधीन कैदियों के मामलों की समीक्षा की गई। इस दौरान 15 विचाराधीन कैदियों की पहचान कर उनके मामलों में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। बैठक में उपायुक्त मेघा भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव रूपा बंदना किरो और मंडल कारा के जेल अधीक्षक उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान गंभीर बीमारी से पीड़ित, बुजुर्ग और जमानत मिलने के बावजूद जमानतदार उपलब्ध नहीं होने के कारण जेल में बंद कैदियों के मामलों पर विशेष चर्चा हुई। इसके अलावा जमानत के योग्य विचाराधीन कैदियों को नियमानुसार राहत दिलाने की प्रक्रिया पर भी जोर दिया गया। समिति ने झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार की निर्धारित 16 श्रेणियों में से चौथी श्रेणी के तहत आने वाले आपसी समझौते से निपटाए जा सकने वाले आपराधिक मामलों से जुड़े 15 विचाराधीन कैदियों की पहचान की। संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडेय ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गरीब या असहाय व्यक्ति कानूनी जानकारी के अभाव में अनावश्यक रूप से जेल में बंद न रहे। पात्र बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराते हुए उनके मामलों के त्वरित निष्पादन और नियमानुसार राहत दिलाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।

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