महाशिवरात्रि इस वर्ष विशेष ज्योतिषीय संयोग में मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि, सर्वार्थ सिद्धि योग और शुभ नक्षत्रों के दुर्लभ मेल से यह पर्व आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। श्रद्धालु व्रत, रात्रि-जागरण, रुद्राभिषेक और चार प्रहर की पूजा के माध्यम से भगवान शिव की आराधना करेंगे। धार्मिक मान्यता है कि इसी पावन रात्रि में माता पार्वती और शिव का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था।
15 फरवरी को मनाई जाएगी महाशिवरात्रि।
मिथिला पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को सायं 4:36 बजे से 16 फरवरी प्रातः 5:22 बजे तक रहेगी। चूंकि 15 फरवरी की रात्रि में चतुर्दशी विद्यमान रहेगी, इसलिए शास्त्रसम्मत रूप से महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। तिथि को लेकर भ्रम पर पंडित नितेश कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि अधिकांश पर्व उदया तिथि के आधार पर होते हैं, लेकिन महाशिवरात्रि में रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है। जिस दिन चतुर्दशी रात्रि में आती है, उसी दिन व्रत और मुख्य पूजा विधानानुसार की जाती है।
दिनभर पूजा मान्य, रात्रि-पूजन का विशेष महत्व।
उन्होंने बताया कि श्रद्धालु प्रातःकाल से व्रत, जप, अभिषेक और पूजन शुरू कर सकते हैं। निशिता काल और चार प्रहर की रात्रि-पूजा विशेष फलदायी मानी गई है, लेकिन दिनभर श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शिव-आराधना भी पूर्णतः मान्य है।
सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 7:48 बजे तक
ज्योतिषीय गणना के अनुसार।
महाशिवरात्रि के दिन सुबह 7:00 बजे से शाम 7:48 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। साथ ही उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का संयोग साधना, जप और संकल्प के लिए अनुकूल वातावरण बनाएगा।
शिवलिंग का अर्थ: ऊर्जा और चेतना का प्रतीक।
पंडित नितेश कुमार मिश्रा ने बताया कि शिवलिंग केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सृष्टि की चेतना और ऊर्जा का द्योतक है। ‘बिंदु’ और ‘नाद’ को सृष्टि के मूल तत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि शिवलिंग की संरचना पंचमहाभूत—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—का प्रतिनिधित्व करती है। लिंग पुराण में इसे ज्योतिर्मय स्वरूप कहा गया है, जो सृष्टि के मूल तत्व और ऊर्जा के अखंड स्रोत का प्रतीक है।
मंत्र-जप और जलाभिषेक का मन पर प्रभाव।
उन्होंने कहा कि जलाभिषेक और मंत्रोच्चार से उत्पन्न ध्वनि-तरंगें मन और मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप ध्यान और साधना में सहायक माना गया है।
12 ज्योतिर्लिंग: शिव-ऊर्जा के प्रमुख केंद्र।
देश के 12 ज्योतिर्लिंग शिव की दिव्य ऊर्जा के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा, रुद्राभिषेक और शिवनाम-स्मरण विशेष फलदायी बताया गया है।






