पाकुड़। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में चैत्र नवरात्र के नौ दिवसीय अनुष्ठान का समापन शनिवार को दशमी तिथि पर पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। इस अवसर पर सिंदूर खेला, शोभायात्रा और घट एवं प्रतिमा विसर्जन के साथ माँ दुर्गा को भावभीनी विदाई दी गई। शहर के राज हाई स्कूल स्थित दुर्गा कॉलोनी में चैती दुर्गा पूजा का समापन विधि-विधान से घट विसर्जन के साथ हुआ। यहाँ स्थापित माँ दुर्गा की स्थायी संगमरमर प्रतिमा के कारण प्रतिमा विसर्जन नहीं किया जाता है। परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं ने कलश का विसर्जन किया। इससे पहले महिलाओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सिंदूर खेला की रस्म निभाई और सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं अमड़ापाड़ा प्रखंड के डुमरचीर गांव स्थित वैष्णवी दुर्गा माता मंदिर में प्रतिमा विसर्जन किया गया। नौ दिनों तक पूजा-अर्चना के बाद शनिवार को श्रद्धालुओं ने माँ की प्रतिमा को नगर भ्रमण के लिए निकाला। डीजे और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए जुलूस में शामिल हुए। विसर्जन से पहले महिलाओं ने मंदिर में सिंदूर खेला कर माँ को विदाई दी।
इसके बाद शोभायात्रा इकड़ी नदी घाट पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने नम आंखों से माँ दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया। इस दौरान भक्तों ने अबीर-गुलाल लगाकर एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।
पूरे आयोजन के दौरान ‘जय माता दी’ और ‘आसचे बछोर आबार होबे’ के जयघोष गूंजते रहे। मौके पर स्थानीय पुलिस प्रशासन भी मौजूद रहा, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।








