बारिश में घुटने भर कीचड़ से जूझ रहे थे लोग, बार-बार गुहार के बाद भी नहीं हुई सुनवाई, रामपुर के ग्रामीणों ने खुद संभाली जिम्मेदारी।
इकबाल हुसैन
महेशपुर (पाकुड़)। जब जिम्मेदारों से उम्मीद टूटने लगी, तो ग्रामीणों ने खुद ही अपनी समस्या का समाधान निकाल लिया। महेशपुर प्रखंड के रामपुर गांव में ग्रामीणों ने चंदा जुटाया, जेसीबी मशीन मंगवाई और श्रमदान कर कहारपाड़ा टोला को जोड़ने वाली बदहाल सड़क को चलने लायक बना दिया। ग्रामीणों की इस पहल ने जहां एकजुटता की मिसाल पेश की, वहीं सड़क की बदहाली और मरम्मत में देरी को लेकर व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए।
घुटने भर कीचड़, हर कदम पर हादसे का खतरा।
लगातार बारिश के कारण सड़क कीचड़ में तब्दील हो गई थी। स्थिति ऐसी थी कि लोगों के लिए पैदल चलना भी मुश्किल हो गया था। बाइक सवारों के फिसलकर घायल होने की घटनाओं से ग्रामीण परेशान थे। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से सड़क की मरम्मत कराने की गुहार लगाई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
जेब से पैसे लगाए, खुद मैदान में उतरे।
आखिरकार ग्रामीणों ने इंतजार छोड़कर खुद पहल करने का निर्णय लिया। आपस में चंदा इकट्ठा किया गया और जेसीबी मशीन बुलाकर सड़क पर जमा कीचड़ हटवाया गया। ग्रामीणों ने श्रमदान कर रास्ते को समतल कराया, जिसके बाद आवागमन पहले की तुलना में सुगम हुआ।
पहल ग्रामीणों की, अब प्रशासन की बारी।
ग्रामीणों की मेहनत से फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। बारिश के बाद दोबारा सड़क खराब होने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सड़क का नए सिरे से निर्माण कराने की मांग की है, ताकि उन्हें हर बरसात में इसी परेशानी से न जूझना पड़े। रामपुर के ग्रामीणों की पहल ने साफ संदेश दिया है कि एकजुटता से मुश्किलें आसान हो सकती हैं। लेकिन बुनियादी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को खुद चंदा जुटाकर सड़क दुरुस्त करने की नौबत आना व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल भी है।
मौके पर कमल शेख, डालिम शेख, सफीक शेख समेत दर्जनों ग्रामीण मौजूद थे।








