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May 11, 2026 3:16 am

आदिवासी समाज का पारंपरिक एरो पूजा सम्पन्न

अच्छी फसल व विवाह दंपत्ति के कुशल मंगल की मांगी गई मन्नत।

सतनाम सिंह

पाकुड़: संथाल आदिवासी की परंपरा अनुसार पाकुड़िया के मोहुलपहाड़ी गांव में एरो पूजा संपन्न हुई। आदिवासी समाज के लोगों ने सर्वप्रथम जाहेर स्थान में गोबर लीप कर पांच पहाड़ी बाबा जिन्हें प्राकृतिक का देवता कहते है पूजा अर्चना की जाती है,विशेषकर मरांगबुरु, जाहेर् एरा, गोसाई एरा, परगना बंगा, इत्यादि. का जहेरस्थां में पूजा की जाती है, इन सभी पहाड़ी देवता जिन्हे प्राकृतिक का देवता कहा जाता है इनकी पूजा के बाद एरो पूजा विधि विधान के साथ मनाया जाता है, ग्रामीण अच्छी बारिश और नए दंपति का वैवाहिक जीवन अगले साल तक कुशल मंगल से रहे इसलिए ऐरो पूजा का अपना एक अलग ही महत्व है। यह पूजा आदिवासी समाज में हजारों वर्षों से चली आ रहा है। इस मौके पर प्रखंड विकास पदाधिकारी साइमन मरांडी ने कहा कि एरो पूजा हमारे आदिवासी समाज की हजारों साल पुरानी परंपरा है एरो का मतलब होता है बिज डालना, बरसों से इस परंपरा को हम लोग मानते हैं। एरो पूजा के बाद ही फसल की बीज बोया जाता है और हमारे समाज में ऐसा मान्यता है एरो पूजा करने के बाद जब खेत में बिज डाला जाता है तब बीज उगने के दरमियान किसानों को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है यहां तक पशु पक्षी भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। एरो पूजा के बगैर ही अगर खेतों में बीज डाल दिया जाता है तो वह फसल पशु पक्षी द्वारा नष्ट कर दिया जाता है और फसल की उपज नहीं होती है। रविवार को मोहुलपहाड़ी गांव में आदिवासी समाज इकट्ठा होकर इस पूजा को संपन्न कराया। इसके साथ विवाह दंपति के अगला साल तक कुशल मंगल की कामना की गई। जिससे विवाह दांपत्ती जीवन में खुशहाली बनी रहे। प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा कि चाहे झारखंड हो व हमारे देश के लोग दुर्गा पूजा ईद होली दिवाली को ही जानते हैं लेकिन इस पर्व के महत्व को भी जानने की आवश्यकता है जो काफी जनकल्याणकारी और लाभदायक है।आदिवासी समाज की परंपरा के पांच नींव ग्राम प्रधान(मांझी), प्राणिक, जोगमांझी, नायकी, कुदुम नायकी यह पांच व्यक्ति गांव और संथाल समाज के रीति रिवाज के कर्ता धर्ता है।यह पांच व्यक्ति के ऊपर समाज और गांव में जन्म, मृत्य,विवाह पर्व त्यौहार इनके अपने फैसले इनको खास बनाते है। आदिवासियों का मानना है एरो पूजा को झारखंड सरकार मान्यता प्रदान करे क्योंकि यह आदिवासी समाज का एक महत्वपूर्ण पर्व है। मौके पर प्रधान अमित टुडू, प्रमाणिक सुनील मुर्मु, नायकी नूनालाल सोरेन, कुडम नायकी काका टुडू, जोग मांझी सुरेश सोरेन,हबील सोरेन, नरेन मुर्मु,पूर्व जिला परिषद् स्टीफन मरांडी,मुखिया प्रकाश मरांडी, जियोन मरांडी, इलियास किस्कू,अजीत मरांडी, निकोलस मुर्मु एवं ग्रामीण एरो पूजा हम संथाल आदिवासियों के लिए गर्व की बात है, एरो पूजा के बाद हम लोग फसल लगाते हैं और फसल पकने के बाद हम लोग सोहराय पर्व बड़े ही धूमधाम के साथ मनाते है।

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एरो पूजा में सम्मिलित होकर में धन्य हुआ, पुरा पाकुड़ जिला,संथाल परगना के साथ झारखंड में अच्छी बारिश की कामना एवं प्रार्थना करता हूं, बीडीओ साइमन मरांडी,पाकुड़िया
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एरो पूजा आदिवासी समाज के लिए बहुत बड़ा पर्व है, इस पर्व को कानूनी मान्यता भी प्राप्त है, में झारखंड सरकार से मांग करूंगा कि एरो पूजा पर 1 दिन का अवकाश घोषित किया जाए और इस पर्व पर सरकार की तरफ से मान्यता प्रदान की जाए और गांव में पारंपरिक व्यवस्थाओं बहाल हो आदिवासी समाज में,बोरियो विधायक लोबिन हेंब्रम।
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एरो पूजा आदिवासी समाज के लिए बहुत बड़ी पूजा है,एरो पूजा करने के बाद ही फसल लगाया जाता है,फसल पकने के बाद सोहराय पर्व मनाया जाता है,एरो पूजा को झारखंड सरकार से मान्यता प्राप्त हो, में झारखंड सरकार के पास ऐसा प्रस्ताव रखूंगा कि आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्थाओं बहाल हो,इसको लेकर भी झारखंड की हेमंत सरकार से बात करूंगा और हर संभव प्रयास करूंगा, महेशपुर विधान सभा विधायक स्टीफन मरांडी।
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संथाल का जितना भी पर्व त्यौहार है सभी प्रथा कस्टम पर आधारित है। तथा कस्टम को संविधान 13 (3) क के धारा धारा कानूनी मान्यता प्राप्त है। अर्थात कस्टम भी एक कानून है। एरो पर्व बीज फेंकने के समय मनाया जाता है। उसमें अच्छी बरसात तथा फसल को कीड़ा मकोड़े से बचने के लिए कामना की जाती है।
सनत कुमार सोरेन
अध्यक्ष माझी परगना लहांती वैसी पाकुड़

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