बजरंग पंडित
पाकुड़। डायन प्रथा एवं अंधविश्वास आज भी कई समाज में पूर्व की भांति बरकरार है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। इस अंधविश्वास के कारण लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। समाज के कोढ कहे जाने वाले डायन प्रथा सभ्य समाज में कहीं भी स्थान नहीं है। बावजूद कई लोग डायन प्रथा शिकार हो रहे हैं। और अंधविश्वास ऐसी की सामूहिक रूप से लोग दोषी ठहरा कर निर्दोष की जान ले लेते हैं ।इसे पाकुर जिले की पुलिस ने गंभीरता से लिया है और इस दिशा में समाज को जागरूक करने का काम लगातार कर रही है । इसी कड़ी में लेकर हिरणपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रामनाथपुर एवं घाघर जनी मैं हिरणपुर पुलिस द्वारा डायन प्रथा के रोकथाम हेतु जागरूकता अभियान चला रही है। हिरणपुर थाना प्रभारी सुनील कुमार रवि अपने दल बल के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं की डायन कुछ नहीं होता। जान लेना और देना सब ईश्वर के हाथ में है । कोई जादू टोना या डायन नहीं होता । किसी के बोलने से या सिंदूर ठीक देने से किसी व्यक्ति की मौत नहीं हो सकती । यह सब अंधविश्वास है इसमें जरा भी सत्यता नहीं है ।इसलिए आप सब इसे अपने मन और दिमाग से भलीभांति निकाल दें । ऐसा कुछ नहीं होता की कोई जादू मंत्र से किसी व्यक्ति को मार सके या बीमार कर सके। जानबूझकर साजिश के तहत कुछ लोग यह भ्रम फैलाते हैं और अपनी रोटी सेकते हैं । किंतु इस अंधविश्वास में लोग भयभीत रहते हैं। बाद में आपको भी कानून को के शिकार हो जाते हैं । ऐसा भी देखा गया है जमीन जायदाद के लालच में कुछ लोग समाज को उसका कर पुरुष या महिला को डायन बताकर उसके साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। मारपीट करते हैं और उसे डायन बताते हैं । जबकि हकीकत में उसे किसी की जमीन हड़पना होता है। एक रणनीति के तहत तीन सौ तीन चार लोग मिलकर प्राणी के साथ यह काम करते हैं और समाज के कुछ लोग उसके झांसे में आ जाते हैं और उसका नतीजा गलत होता है । बाद में वह कानून के शिकंजे में आते हैं और जेल की हवा भी खाते हैं । उन्होंने ग्रामीणों को बताया इस तरह के कुप्रथा से बचें। किसी के सुनी सुनाई बातों पर विश्वास ना करें ।बल्कि इस प्रकार की जब बात आती हो तो पुलिस को सूचित करें । ताकि पुलिस उचित करवाई कर सके।उन्होंने कहा कि समाज में सभी को बराबरी की दर्जा है। सभी को अपना अधिकार है कोई भी कानून को अपने हाथ में ना लें और कानून का सहयोग करें।







