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October 25, 2026 10:57 am

जिले में बढ़ती गर्मी को देखते हुए बढ़ी देसी फ्रिज की डिमांड।

सतनाम सिंह

पाकुड समेत पूरे जिले में अचानक गर्मी का तापमान बढ़ने से लोगों का हाल बेहाल हो गया है, पाकुड सहित जिले के कई प्रखंड में गर्मी का पारा बढ़ते ही बाजारों में देसी फ्रीज का डिमांड बढ़ गया है। जैसे जैसे गर्मी का पारा चढ़ रहा है। वैसे ही साप्ताहिक हटिया में मिट्टी से बना बर्तनों की बिक्री बढ़ती जा रही है। इन दिनों लोग अपने अपने घरों में धूप की तपिस को कम करने के लिए देसी फ्रीज यानी मिट्टी से बना बर्तन खूब खरीद रहे है। मिट्टी से बना मटके का पानी किसी फ्रीज से कम ठंडा नहीं होता है। और पानी का स्वाद भी कई गुना बढ़ा देता है ।साथ ही मटके का पानी स्वास्थ्य के लिए काफी उत्तम है। मिट्टी के घड़े की बढ़ती मांग को देखते हुए बाजार में कुम्हार कई किस्म के मिट्टी से बना बर्तन बाजार में बेच रहे हैं। महंगाई बढ़ने के साथ-साथ पेशी फ्रीज की खरीददारी करते लोग इनकी कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। कुम्हार ग्राहकों की मांग के अनुरूप विभिन्न प्रकार के घड़ा, सुराही, मटका आदि का निर्माण कर हटिया बाजार में बेच रहे हैं। इसकी सबसे मजेदार बात यह है कि आज भी देशी फ्रिज की माग समाज के सभी वर्गों में है।खास कर बिजली की लचर व्यवस्था को देखते हुए सभी वर्गों के परिवार इसके कायल हैं। बाजार में। एक घड़े की कीमत 50 से 100 रुपए तक बिकता है। प्रखंड के मोंगलाबांध,आमकोना एवं गणपुरा गांव के कुम्हार इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। मोंगला बांध के धरनी पाल, नीलकंठ पाल, सुबोध पाल, मोहन पाल, ने बताया कि हमलोंग बीस से अधिक वर्षों से इस धंधा से जुड़े हुए है। बाहर महीना हमलोंग विभिन्न हाट बाजारों में मिट्टी से बना बर्तन बेच कर अपने परिवार का भरण पोषण करते है। बताया पिछले पांच-छह वर्षों से मिट्टी के बने बर्तन की बिक्री में कमी आई है गर्मी आते ही मिट्टी से बना बर्तन की विक्री कुछ हद तक ठीक ठाक रहता है।

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