सुदीप कुमार त्रिवेदी
एक तरफ केंद्र व राज्य सरकार स्वच्छता अभियान चलाकर आम लोगों को जागरुक कर रही है, स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से शहर दर शहर व ग्रामीण दर ग्रामीण इलाकों में बड़े-बड़े पोस्टर बैनर व होर्डिंग लटकाये जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर लोग बाग अपनी ही दुनिया व जीवन शैली में जीने को मजबूर हैं ।विडंबना देखिए कि खुद के घर को साफ रखने की समझाइश उस समय गायब होती दिखती है जब आस पड़ोस में गंदगी फैलाई जाती है । ये नजारा गाँधी चौक का है एवं ऐसा ही हिरण चौक पर भी देखने को मिला । इस मामले पर स्थानीय लोगों की शिकायत है कि उक्त स्थल पर कूडादान नही है जिसके कारण लोग कचरा फेंक देते हैं । इस मामले में स्थानीय लोगों के तर्क़ माकूल तो है पर एक सवाल तो यह भी है कि कूड़ेदान के नहीं होने के कारण सड़क को कूड़ेदान बनाया तो नहीं जा सकता है ना ? यह सही है कि हम प्रशासन को उनकी गलत कार्यशैली पर कोसें लेकिन केवल इस बात के भरोसे अपनी कर्तव्यपरायणता को भूल जाना भी सही नही है ।






