25 हजार का RO एक लाख में खरीद ज्ञान केंद्र’ के नाम पर करोड़ों की हुई बंदरबांट,सूत्र।
किसी एक साहब को तीन पद,बड़ी मेहरबानी।
पाकुड़ जिले में पंचायत स्तर पर विकास के नाम पर सरकारी खजाने को चूना लगाने का एक बड़ा खेल सामने आया है। सूत्रों के अनुसार सरकारी योजनाओं में वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि बाजार में महज 20 से 25 हजार रुपये में मिलने वाला आरओ (RO) सिस्टम कागजों पर एक लाख रुपये से अधिक का दिखाकर सरकारी राशि की निकासी कर ली गई। यह गड़बड़ी किसी एक पंचायत में नहीं, बल्कि लिट्टीपाड़ा, अमड़ापाड़ा और पाकुड़ प्रखंड सहित कई क्षेत्रों में संगठित रूप से की गई है।इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला प्रशासनिक घालमेल भी सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, जिले में नियमों को ताक पर रखकर एक ही चहेते अधिकारी को तीन-तीन महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है अब सवाल यह उठ रहा है कि जब जांच करने वाला, मॉनिटरिंग करने वाला और योजना लागू करने वाला एक ही चेहरा होगा, तो कार्य में पारदर्शिता कैसे आएगी? यह ‘थ्री-इन-वन’ व्यवस्था खुद घोटाले को संरक्षण देने जैसी है।
‘ज्ञान केंद्र’ भी बने लूट का केंद्र, स्मार्ट टीवी गायब, अलमीरा की जगह थमाए रैक
जिले की 128 पंचायतों में ग्रामीणों और बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए “ज्ञान केंद्र” स्थापित किए जाने थे। लेकिन धरातल पर यह योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।केंद्रों के लिए स्वीकृत स्मार्ट टीवी कई पंचायतों तक पहुंचे ही नहीं।जहां मजबूत और निर्धारित मापदंड की अलमीरा दी जानी थी, वहां बेहद साधारण और घटिया रैक लगाकर कोरम पूरा कर लिया गया। सामग्री खरीद की प्रक्रिया से पूरी तरह पारदर्शिता गायब रही और चहेते सप्लायरों को फायदा पहुंचाया गया।पाकुड़ प्रखंड कार्यालय में बिना किसी अधिकृत वेंडर के ही करोड़ों रुपये की सामग्री सप्लाई करा दी गई। चर्चा है कि यह पूरी सप्लाई डीपीएम से जुड़े कुछ खास सिंडिकेट के माध्यम से हुई। जब इस बाबत विभागीय अधिकारियों से बात की गई, तो वे किसी भी आधिकारिक नियुक्ति या वेंडर लिस्ट से साफ मुकर गए।
एक ही चेहरे के कई मुखौटे:अलग-अलग नामों से हुई बिलिंग
भ्रष्टाचार के इस खेल को छिपाने के लिए जालसाजी का सहारा लिया गया। सूत्रों का दावा है कि एक ही सिंडिकेट/व्यक्ति द्वारा अलग-अलग फर्जी नामों और फर्मों के बिल तैयार किए गए और भुगतान उठा लिया गया। हिरणपुर और साहिबगंज के बरहरवा क्षेत्र के कुछ संदिग्ध सप्लायरों की भूमिका इसमें मुख्य बताई जा रही है।जमीनी हकीकत यह है कि पंचायतों में बनाई गई जल मीनारें और हैंडवॉश स्टेशन घटिया निर्माण के कारण शुरू होने से पहले ही जर्जर हो चुके हैं, जिसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा है।
स्वतंत्र जांच की मांग, विभागीय लीपापोती से ग्रामीण नाराज
मामले की भनक लगने पर शुरुआती जांच विभागीय स्तर पर ही कराई गई, जिसे ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि महज एक ‘लीपापोती’ मान रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जो अधिकारी खुद इस व्यवस्था का हिस्सा हैं, वे निष्पक्ष जांच कैसे कर सकते हैं?ग्रामीणों ने उपायुक्त (डीसी) से गुहार लगाते हुए मांग की है कि सभी 128 पंचायतों में आरओ खरीद और ज्ञान केंद्र की सामग्रियों का फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) कराया जाए।एक ही व्यक्ति को तीन पदों पर रखने के प्रशासनिक फैसले और वित्तीय लेन-देन की उच्चस्तरीय जांच हो।फर्जी बिलिंग करने वाले वेंडरों और उनके मददगार अफसरों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते किसी स्वतंत्र एजेंसी से इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब जनता जानना चाहती है कि जनता के टैक्स के पैसे से पंचायतों की सूरत बदलनी थी, लेकिन पाकुड़ में अफसरों और सप्लायरों के गठजोड़ ने अपनी सूरत बदल ली। एक व्यक्ति को तीन पदों का चार्ज देना ही इस बात का सबूत है कि गड़बड़ी की नींव पहले ही रख दी गई थी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस ‘गठजोड़’ पर क्या कार्रवाई करता है। हालांकि जिला पंचायती राज पदाधिकारी प्रीतिलता मुर्मू से उनके पक्ष जानने हेतु फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।






