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May 13, 2026 9:01 am

बांस की कलाकारी ने बदली महिलाओं की जिंदगी, आत्मनिर्भर भारत की रख रही बुनियाद।

एस कुमार

पाकुड़: जेएसएलपीएस से जुड़ने के बाद महेशपुर प्रखंड के पोखरिया गांव की महिलाओं की तस्वीर बदल गई है, जहां रोजगार के अभाव में महिलाएं व पुरुषों का पलायन और हड़िया बेचने की हालत थी. लेकिन अब महिलाएं बांस से सामग्री बनाकर उसे बेहतर दामों में बेच खुशहाल जिंदगी जी रही हैं. महेशपुर प्रखंड के पोखरिया गांव में आजीविका का मुख्य साधन कृषि है. यहां की 90 फीसदी आबादी कृषि पर ही निर्भर करती है. वही 10 प्रतिशत लोग सिर्फ मजदूरी पर निर्भर थे. इस वजह से उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. फिर जेएसएलपीएस के सहयोग से महिलाओं ने सखी मंडल का गठन किया गया. उसके बाद महिला समूह की दीदीयों को बांस से सामान बनाने का प्रशिक्षण दिया गया. वही जेएसएलपीएस के दीदी पोखरिया गांव निवासी ताला मोहलीन को प्रशिक्षण के बाद फूलों झानो आशीर्वाद अभियान में जुड़ी. इसके बाद सखी दीदी ताला मोहलीन ने हाट बाजार व चौक चौराहों में हड़िया दारू बेचने का काम छोड़कर फूलों झानो आशीर्वाद अभियान से जुड़कर दो क़िस्त में 25 हजार ऋण लेकर सुप व डालिया समेत अन्य बांस की सामग्री बनाकर स्वावलंबी बन रही है. साथ ही सखी दीदी के पति भी इस कार्य में सहयोग करते हैं. जहां सुप, डलिया, झाड़ू बनाकर मासिक आय करीब 9 से 10 हजार तक कर रहे है. वही जेएसएलपीएस के कर्मी यंग प्रोफेशनल राहुल कुंडू व ब्लॉक लीड राजेश कुमार महतो ने जानकारी देते हुए बताया कि जेएसएलपीएस से जुड़ने के बाद महिलाएं हड़िया दारू बेचने का कार्य बंद कर सुप डालिया, झाड़ू आदि बनाकर अच्छा खासा पैसा कमा रही है. बताया कि सखी दीदी ताला मोहलीन पहले चौक चौराहों पर बैठ- बैठकर हड़िया दारू बेचने का काम करती थी. जहां दीदी ताला मोहलीन को लोगों के द्वारा अभद्र भाषाओं का सामना करना पड़ता था. लेकिन जेएसएलपीएस से जुड़ने के बाद दीदी ताला मोहलीन को 25 हजार दो किस्तों में दी गई. उन्होंने सुप डलिया बनाकर अच्छी रोजगार कर रही है. दीदी ताला मोहलीन ने अब तक 25 हजार में 7 हजार रुपया लौटा चुकी है. वे इस व्यवसाय को बढाना चाहती है. बताया कि सखी दीदियों को देखकर और भी महिलाएं इस कार्य से जुड़ रही है. और स्वावलंबी बन कर आर्थिक रूप से मजबूत हो रही है.

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