सुदीप कुमार त्रिवेदी
देश की अर्थव्यवस्था व समृद्धि हेतु जहाँ एक ओर प्राकृतिक संसाधन जरूरी होता है वहीं दूसरी ओर इन प्राकृतिक संसाधनों को विकासगामी बनाने के लिए मानव संसाधन का होना भी उतना ही जरूरी है, लिहाजा सामाजिक विज्ञान भी मानता है कि किसी भी देश को अपनी जनसंख्या को बोझ के रूप में कतई परिभाषित नहीं करना चाहिए, परंतु जब देश के लाखों छात्रों के जीवन के साथ किसी भी रूप में खिलवाड़ किया जाता है तो निश्चित रूप से से ये ज्वलंतकारी राष्ट्रीय मुद्दा बन जाता है । फिलवक्त देश में इसी तरह का एक मुद्दा गरम हो उठा है जिसमें National eligibility cum entrance test NEET के कथित तौर पर पेपर लीक और अनियमितता की खबरें तमाम मीडिया व बुद्धिजीवियों का ध्यानाकर्षण किया हुआ है । गौरतलब हो कि देश के किसी भी सरकारी या प्राइवेट मेडिकल कालेज से डाक्टर बनने का ख्वाब देखने वाले छात्रों के लिए NEET क्लियर करना अपरिहार्य है, लेकिन मानव संसाधन निर्मित करने वाली उक्त संस्था इन दिनो कथित तौर पर विवाद के घेरे में आ चुकी है जिसके कारण नीट परीक्षा आयोजित करने वाली NTA की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान खड़े किए जा रहे हैं, हालांकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने, दाखिल एक याचिका की सुनवाई करते हुए काउंसिलिंग पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है जबकि NTA से इस ताजा-तरीन विवाद पर जबाब तलब किया है । उक्त विवाद की बात करें तो 2024 में नीट के जो परीक्षाफल घोषित किए गए हैं उसमें कई तरह की अनियमितताओं मसलन छात्रों को 100 से 150 अंक के ग्रेस मार्क दिए जाने व अचानक एक साथ 67 छात्रों का 720 अंक लाकर टाॅपर होने जैसे आरोप लग रहे हैं । इस संबंध में शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने अपनी अपनी राय दी है । इस बाबत पैरामाउंट साइंस इंस्टीट्यूट के निदेशक रंजन खां ने बताया कि ये मामला निश्चित रूप से चिंताजनक है क्योंकि इनसे सीधे तौर पर लाखों छात्र प्रभावित होंगे । परीक्षा प्रक्रिया के बाबत रंजन खां ने बताया प्रश्नों की संख्या कुल 180 होते हैं एवं हर प्रश्न 4 अंक के होते हैं जिसमें एक प्रश्न के गलत जबाब दिए जाने की स्थिति में ॠणात्मक मूल्याकंन के तहत 5 अंक काट लिए जाते हैं । युपीएससी के तैयारी करवाने वाले शिक्षक रूपेश भगत ने इस मामले पर राय देते हुए कहा कि जो चीजें चल रही है उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए ताकि छात्रों के भविष्य के साथ साथ NTA की विश्वसनीयता भी बनी रहे ।







