सतनाम सिंह
पाकुड़: पाकुड़ और दुमका जिले के युवाओं ने गोपीकांदर के गुम्मामोड़ में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर एक सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें आदिवासी चिरगा़ल जुवान और भारोत संताल आदिवासी लाहांती समिति ने संयुक्त रूप से भाग लिया। जेसीआरटी रांची के निर्देशक मसुदी टुडू और एसपी कॉलेज दुमका के सहायक प्राध्यापक प्रो निर्मल मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। मौके पर मसुदी टुडू ने कहा कि आदिवासियों को एक मंच पर संयुक्त रूप से अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़नी होगी, तभी हम अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जनसंख्या लगभग 48 करोड़ से भी अधिक है, लेकिन हमें अपनी एकता की कमी के कारण हाशिए पर धकेल दिया गया है।वही प्रो निर्मल मुर्मू ने कहा कि आदिवासियों की जनसंख्या में कमी चिंता का विषय है और हमें अपनी अस्तित्व, जल, जंगल, जमीन और जनसंख्या की रक्षा करनी होगी। उन्होंने कहा कि 1951 की जनगणना में आदिवासियों की जनसंख्या लगभग 36 प्रतिशत थी, लेकिन 2011 की जनगणना में यह घटकर महज 26 प्रतिशत रह गई है।कार्यक्रम में बेबीलता टुडू ने महिला अधिकारों पर बात की, जबकि चंद्रमोहन हांसदा ने आदिवासियों के जमीन पर बाहरी घुसपैठ के मुद्दे पर बात की। अजित कुमार टुडू ने सरकारी योजनाओं के लाभ के बारे में बात की। कार्यक्रम में सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदाय को एकजुट करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना था। सभी वक्ताओं ने आदिवासी अस्तित्व की लड़ाई में एकजुटता का आह्वान किया और कहा कि हमें अपने अधिकारों की रक्षा करनी होगी।






