भागवत कथा में राधे -राधे की ध्वनि से गूंज उठा जन सैलाब
राहुल दास
हिरणपुर (पाकुड़): दराजमाठ गांव में आयोजित भागवत कथा सह ज्ञान यज्ञ में वृंदावन से आये कथावाचक पीयूष कौशिक जी महाराज ने कही। मनुष्य को दान जन कल्याण के लिए करना चाहिए , अपनी व्यक्तिगत मान के लिए नही। भक्तिभाव से की गई दान से भगवान प्रसन्न होते है। कथावाचक ने कहा कि ऋषिराज नारद मुनि ने पृथ्वी की परिक्रमा करने को लेकर निकले। पृथ्वीलोक में जहां भी पहुंचे , सभी जगहों पर शांति कही नही दिखी। सब जगहों पर झूठ का बोलबाला था। लोग तपस्याओं से विमुख हो गए थे। कथावाचक ने आगे कहा कि जो दूसरों की दुख देखकर दुखी हो , उसके समस्याओ का निदान करे , उसे ही संत कहते है। संत की आशीर्वाद हमेशा से सार्थक होता है। जो ईश्वरीय आज्ञा होती है। माता पिता का कर्तव्य होता है कि बच्चो को सही संस्कार व कर्म दे। उन्हें सत पथ पर चलने की मार्गनिर्देश दे , न कि बच्चो को कमाई कराने की जरिया बना दे। उन्होंने कहा कि ऋषिराज जब वृंदावन पहुंचे, जहां राधे राधे की गूंज फैली हुई थी। वहां भक्तिभाव की अद्भुत नजारा देखने को मिला ।पथ में एक महिला भक्ति माता को अपने दो बीमार बच्चे ज्ञान व वैराग के साथ पड़ा पाया। महिला ने बच्चो को ज्ञान देने की विनय ऋषिराज से किया। तब उन्हें वेद वेदांत व गीता की पाठ कराई , पर बच्चे नही जागे। तब भगवान की आज्ञा पर ऋषि ने श्रीमद भागवत कथा दोनों बच्चो को सुनाया। वेद वेदांत की सार भगवत कथा है। इसकी श्रवण करने से सारे पाप धुल जाता है। भक्तिभाव से इसका श्रवण करना चाहिए ।अंजाने में की गई गलती क्षम्य है , पर जान बूझकर की गई पाप अक्षम्य है। जीवन के किसी भी कालखण्ड में हमे संकल्प लेना चाहिए , जिससे कि हमारे जीवन सार्थक हो जाये। लोगो मे भक्तिभाव , श्रद्धा व सत कर्म नही है तो जीवन व्यर्थ है। छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र सम्भाजी महाराज की वीरता का वर्णन करते हुए कहा कि ओरेंगजेब को परास्त करने में वीरता के साथ बलिदान हुए। तीर्थ , धर्मग्रन्थ व गुरुजनों पर आस्था व विश्वास रखना चाहिए। गोस्वामी तुलसीदास ने कहा है कि जैसी भावना , वैसी सिद्धि। इसलिए हम जैसा कर्म करेंगे , इसका फल भी वैसी ही मिलेगी। कथा के दौरान कथावाचक ने चलेंगे वृंदावन धाम , राधे राधे की भक्तिमय गीत गाने पर उपस्थित श्रोता झूम उठे।भागवत कथा को लेकर काफी संख्या में महिला पुरुष श्रोता उपस्थित थे।इस अवसर पर आयोजक कमिटी के जकयशिव यादव,मोहनलाल भगत,नन्द लाल यादव सहित सभी सदस्य उपस्थित थे।






