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March 28, 2026 1:17 pm

सुख के समय भगवान को लोग स्मरण करने भूल जाते है – अनन्या शर्मा

चौकिढाप में आयोजित संगीतमय भागवत कथा में उमड़ी भीड़।

राहुल दास

हिरणपुर (पाकुड़): दुखः कष्ट के वक्त लोग भगवान को हर पल याद करते है , पर सुख के समय स्मरण करना भूल जाते है। जबकि भगवान को सुख -दुख हर पल भजना चाहिए। चिंताहरण महादेव भागवत समिति चौकिढाप द्वारा आयोजित संगीतमय भागवत कथा सह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिवस मंगलवार शाम को उपस्थित श्रोताओं के बीच प्रवचन देते हुए मध्यप्रदेश से पधारे कथावाचक अनन्या शर्मा ने कही। कथा को लेकर काफी संख्या में महिला पुरुष उपस्थित थे। दुखः में सुमिरन सब करे , सुख में करे न कोई की उक्ति को विश्लेषण करते हुए कथावाचक ने कही की भगवान ही हमारी तारणहार है , इनकी स्तुति हर पल करना है। गीता में उल्लेख है कि अर्जुन ने श्रीकृष्ण को गुरु का स्थान दिया था। जो हर समय पांडवो को उपदेश देते रहता था , पर युधिष्ठिर को यह उपदेश समझ मे नही आ रहा था। इस बात की ज्ञात श्रीकृष्ण को हो गया था। इसको लेकर पांडवो को भीष्म पितामह के पास ले जाने की बात कही। पांडवो के साथ साथ द्रोपदी को भी जब ले गया , वहां भीष्म पितामह वाणों की सैया में पड़े हुए थे। उन्होंने प्रवचन देते हुए आगे कही की जब श्रीकृष्ण ने भीष्मपितामह से पांडवो को उपदेश देने की बात बोला तो कहा कि आप तो स्वंय ज्ञानी है। तब भीष्म ने कहा कि खूब धन कमाओ , पर कमाए गए धन की 10 वा भाग दान करो। दान देने से धन पवित्र होता है व भजन करने से मन। कभी भी अपने आखों के सामने अन्याय होते मत देखो, सामर्थ है तो अन्याय का प्रतिवाद करो। इस बीच द्रोपदी हंस पड़ी। तब भीष्म पितामह ने कहा कि कुलवती स्त्री कभी लोगो के सामने नही हंसती । इसमे जरूर कुछ महत्वपूर्ण कारण है। उपदेश देना तो अति सहज है पर इसे जीवन मे उतारना उतना ही कठिन। जब कौरवों की राज दरबार मे द्रोपदी की चीरहरण हो रहा था तो क्यो नही रोका गया। इस पर सभी ने कहा कि पाप देखा है। कथावाचक ने आगे कही की जब सभी पांडव लौटने लगे तो श्रीकृष्ण भीष्म पितामह के पास रुक गए। पांडवो ने पूछे जाने पर बताया कि मैंने वचन दिया है कि जीवन के अंतिम समय मे भीष्म पितामह के पास रहूंगा। महाभारत के युद्ध मे कौरव के कहने पर भीष्म ने प्रतिज्ञा किया था कि अगले दिन की लड़ाई में एक पांडव का वध जरूर करूंगा। इसकी जानकारी मिलने पर श्रीकृष्ण ने योजना बनाकर द्रोपदी को भीष्म पितामह के पास भेजा। जो बिना आवाज किये भीष्म के विश्राम कक्ष में पहुंचकर चरण स्पर्श किया। इसके बाद भीष्म ने स्वभाविक रूप से अखण्ड सौभाग्यवती का आशीर्वाद दिया। तब भीष्म ने श्रीकृष्ण से अनुरोध करते हुए कहा था कि आपकी इच्छा पूर्ण होगी , पर मेरी इच्छा है कि मेरे जीवन के अंतिम बेला में आप हमारे निकट रहे । महाभारत की युद्ध में प्रतिज्ञा से बढ़कर आशीर्वाद की जीत हुई। कथा में भगवान शिव की मनमोहक झांकी की प्रस्तुति की गई , वही धार्मिक गीतों से श्रोता झूम उठे ।इस भागवत कथा के दौरान आयोजक समिति के सभी सदस्य उपस्थित थे। उधर दराजमाठ में भी आयोजित भागवत कथा में श्रीकृष्ण लीला की विस्तृत वर्णन की गई।

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