पाकुड़। जिले में मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन और पारदर्शी बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाया है। शुक्रवार को रविन्द्र भवन, पाकुड़ में SIR/PRE-SIR, ब्लैक एंड व्हाइट/धुंधला मतदाता पहचान पत्र सुधार और मतदान केंद्रों के रेशनलाइजेशन को लेकर बीएलओ व बीएलओ पर्यवेक्षकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त मनीष कुमार, अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन, अनुमंडल पदाधिकारी, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी व अंचलाधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। प्रशिक्षण के दौरान उपायुक्त मनीष कुमार ने स्पष्ट कहा कि निर्वाचन आयोग मतदाता सूची से जुड़े कार्यों की सख्ती से समीक्षा करता है, ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बीएलओ व पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया कि केवल वास्तविक और पात्र मतदाताओं को ही सूची में शामिल किया जाए। मृत मतदाताओं के नाम हटाने, स्थानांतरित मतदाताओं की प्रविष्टि सुधारने और डुप्लीकेट नामों की पहचान कर हटाने का काम पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ किया जाए।
उपायुक्त ने कहा कि गलत तरीके से नाम हटना या मृत मतदाता का नाम सूची में बने रहना व्यावहारिक समस्याएं पैदा करता है। इसलिए हर सुपरवाइजर को अपने क्षेत्र की पूरी जानकारी रखते हुए सत्यापन के बाद ही प्रविष्टि सुनिश्चित करनी होगी। जिन क्षेत्रों में अब तक मैपिंग या सत्यापन पूरा नहीं हुआ है, वहां अगले दो–तीन दिनों में अनिवार्य रूप से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर उन टोला व क्षेत्रों को प्राथमिकता देने को कहा गया, जहां बीएलओ अब तक नहीं पहुंचे हैं।
उन्होंने बताया कि पाकुड़ नगर क्षेत्र में अभी भी कुछ पोलिंग एरिया ऐसे हैं, जहां मतदाता सूची से वंचित रह गए हैं। समय रहते सुधार नहीं होने पर संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज मंगवाए जाएंगे। प्रशिक्षण के दौरान उपायुक्त ने उपस्थित कर्मियों को निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिरहित निर्वाचन सुनिश्चित करने की शपथ भी दिलाई। अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन ने कहा कि सीमावर्ती जिला और नगर परिषद क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों के कारण पूर्व में कुछ चुनौतियां सामने आई हैं। उन्होंने सभी कर्मियों से योजनाबद्ध और सघन प्रयास करने का आह्वान करते हुए कहा कि मतदाता सूची को इस तरह तैयार किया जाए कि भविष्य में किसी भी आपत्ति या सुनवाई की स्थिति में जिला प्रशासन तथ्यों के साथ मजबूती से अपनी बात रख सके। प्रशिक्षण सत्र में फील्ड स्तर की समस्याओं, दस्तावेज सत्यापन, ऑनलाइन प्रविष्टि, समयबद्ध कार्य निष्पादन और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुपालन पर विशेष जोर दिया गया।







