पाकुड़ जिले के हिरणपुर प्रखंड अंतर्गत बेलडीहा गांव की आदिवासी महिला दुलारस किस्कू ने यह साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और मेहनत के बल पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं। सखी मंडल से जुड़कर शुरू किया गया उनका बतख पालन आज दो लाख रुपये की आय का सफल मॉडल बन चुका है। नवंबर में बतख पालन की शुरुआत करने वाली दुलारस ने नववर्ष 2026 के मौके पर 400 बतख ₹500 प्रति की दर से बेचकर ₹2 लाख की सीधी आमदनी हासिल की। पारंपरिक खेती पर निर्भर सीमित आय वाले परिवार के लिए यह बदलाव नई दिशा देने वाला साबित हुआ।
शुरुआत में उन्होंने सखी मंडल से ऋण लेकर 50 बतख, 50 मुर्गी और 2 बकरियों से काम शुरू किया। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद हौसला नहीं टूटा। पहली सफलता के बाद उन्होंने दोबारा ऋण लेकर बड़े स्तर पर काम बढ़ाया और आज 500 बतख व 400 मुर्गियों का सफलतापूर्वक पालन कर रही हैं। दिसंबर में मुर्गी बिक्री से उन्हें ₹80 हजार की अतिरिक्त आय भी हुई। आय बढ़ने के साथ दुलारस ने स्थायी तालाब का निर्माण, पक्के मकान की योजना और बच्चों की बेहतर शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया है। वे सखी मंडल के माध्यम से मछली पालन भी कर रही हैं, जिससे आय के कई स्रोत तैयार हो गए हैं। इस सफलता के पीछे जेएसएलपीएस, सखी मंडल और परिवार का सहयोग अहम रहा। दुलारस किस्कू की यह कहानी उन तमाम ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती हैं।







