कोयला-पत्थर ढुलाई ठप होने पर बोले मंत्री—रेलवे को क्षेत्र की मांगों पर तुरंत फैसला लेना होगा
पाकुड़–साहेबगंज रेलखंड में यात्री सुविधाओं की अनदेखी को लेकर चल रहे आंदोलन को लेकर राज्य के श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव ने खुलकर रेलवे पर सवाल खड़े किए हैं। मंत्री ने पत्थर और कोयला ढुलाई ठप होने के पीछे व्यवसायियों की नाराजगी को जायज ठहराते हुए कहा कि यह क्षेत्र रेलवे के लिए बड़ा राजस्व स्रोत है, इसके बावजूद यहां की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। श्रम मंत्री ने कहा कि पाकुड़ और साहेबगंज से हर साल रेलवे को करोड़ों रुपए की आमदनी होती है, लेकिन यात्रियों को न तो पर्याप्त ट्रेन सेवाएं मिल रही हैं और न ही बुनियादी सुविधाएं। जहां से रेलवे को लगातार कमाई हो रही है, वहां के लोगों को बेहतर सुविधा देना रेलवे की जिम्मेदारी है, मंत्री ने कहा।
मंत्री बोले—आंदोलन मजबूरी, नहीं था दूसरा रास्ता
संजय यादव ने स्पष्ट किया कि व्यवसायियों का आंदोलन किसी दबाव की राजनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही उपेक्षा का नतीजा है। उन्होंने कहा कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद व्यवसायियों को माल ढुलाई रोकने जैसा कदम उठाना पड़ा।
रेलवे और सरकार को मिलकर निकालना होगा समाधान
श्रम मंत्री ने कहा कि इस आंदोलन से रेलवे को रोजाना करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है, जो किसी के हित में नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार और रेलवे को आपसी समन्वय से तुरंत समाधान निकालना चाहिए, ताकि न सिर्फ माल ढुलाई बहाल हो, बल्कि आम यात्रियों को भी राहत मिले।
सीधी ट्रेन और ठहराव की मांग को बताया जायज
मंत्री ने पटना और दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन सेवा, कोविड के दौरान बंद हुई ट्रेनों के पुनः संचालन और पाकुड़ स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव की मांग को पूरी तरह उचित बताया। उन्होंने कहा कि इन मांगों से न केवल स्थानीय लोगों को फायदा होगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
संकेत साफ—रेलवे ने देर की तो बढ़ेगा दबाव
मंत्री के बयान के बाद साफ है कि अगर रेलवे ने जल्द सकारात्मक पहल नहीं की, तो आंदोलन और तेज हो सकता है। फिलहाल पत्थर के बाद कोयले की ढुलाई भी ठप है, जिससे रेलवे पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
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