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February 25, 2026 12:59 am

पाकुड़ में भाजपा की अंदरूनी खींचतान, सबरी के बागी तेवर से बदला सियासी समीकरण

पार्टी लाइन से अलग कदम, सबरी पाल के फैसले ने बढ़ाई हलचल

अंदरखाने असंतोष, बाहर सन्नाटा—क्या आने वाला है बड़ा उलटफेर?

पाकुड़ नगर निकाय चुनाव के बाद शहर की राजनीति में अप्रत्याशित हलचल देखने को मिल रही है। भाजपा नेत्री सबरी पाल का बागी रुख अब केवल दलगत अनुशासन का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि यह संगठन के भीतर उभरे मतभेद और जनता की बदलती मनोदशा का संकेत बनकर सामने आया है। चुनाव से पहले पार्टी की आंतरिक रायशुमारी में उनके पक्ष में समर्थन की चर्चा थी, लेकिन अंतिम समय में पार्टी नेतृत्व ने आधिकारिक रूप से संपा साहा के समर्थन की घोषणा कर दी। इसी फैसले के बाद पार्टी दो धाराओं में बंटी नजर आई—एक वर्ग सबरी पाल के साथ खुलकर खड़ा दिखा, जबकि दूसरा औपचारिक रूप से पार्टी लाइन पर रहा।चुनावी मैदान में इसका असर भी साफ दिखाई दिया। सबरी पाल के समर्थन में निकले रोड शो में उमड़ी भीड़ और उत्साह ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा। दूसरी ओर, भाजपा समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में हुए कार्यक्रम अपेक्षाकृत शांत रहे। जानकारों का मानना है कि यह केवल गुटबाजी का परिणाम नहीं, बल्कि स्थानीय मुद्दों पर पनपी नाराजगी का भी प्रतिबिंब है।शहर में बीते पांच वर्षों के विकास कार्यों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गंगा जल आपूर्ति जैसी मूलभूत सुविधा अब भी अधूरी मानी जा रही है। सफाई व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को लेकर भी लोगों की शिकायतें खुलकर सामने आईं। इन मुद्दों ने चुनाव को ‘स्थिरता बनाम बदलाव’ की बहस में बदल दिया।चुनाव चिह्नों की चर्चा भी कम नहीं रही। ईंट छाप को अलग पहचान मिली, वहीं बाल्टी छाप को पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक का सहारा माना गया। अब सबकी निगाहें 27 फरवरी पर टिकी हैं, जब मतपेटियां खुलेंगी और स्पष्ट होगा कि जनता ने संगठनात्मक निर्णय को प्राथमिकता दी या बदलाव की आवाज को समर्थन दिया। फिलहाल शहर में सियासी चुप्पी है, लेकिन उस चुप्पी के भीतर परिणाम को लेकर गहरी उत्सुकता साफ महसूस की जा सकती है।

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